
हिमाचल प्रदेश में अब बिना क्यूआर कोड से लिंक सिक्योरिटी होलोग्राम वाली शराब की बिक्री नहीं हो सकेगी। प्रदेश सरकार ने नकली और अवैध शराब की बिक्री पर सख्ती करते हुए अप्रैल 2026 से नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। 2026-27 की अधिसूचित आबकारी नीति में इस प्रावधान को शामिल किया गया है। कर एवं आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में बिकने वाली शराब की हर बोतल पर क्यूआर कोड से लिंक होलोग्राम लगाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही बॉटलिंग प्लांट से निकलने वाली हर पेटी पर बार कोड होगा, जिसे रीड करने के बाद ही सप्लाई बाहर भेजी जाएगी। प्रदेश में यह व्यवस्था वर्ल्ड बैंक के वित्त पोषित ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम के तहत लागू की जा रही है। इस सिस्टम के जरिये एक-एक बोतल का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। नई व्यवस्था के तहत हर बोतल पर सिक्योरिटी होलोग्राम और क्यूआर कोड अनिवार्य रहेगा। हर पेटी/कार्टन पर अलग बार कोड होगा। प्लांट से बाहर भेजने से पहले बार कोड स्कैन होंगे। गोदाम पहुंचने पर दोबारा स्कैनिंग होगी। रिटेल शॉप पर भेजते समय बैच नंबर से पूरी ट्रैकिंग की जाएगी। इस प्रक्रिया से यह पता चल सकेगा कि कौन सी पेटी किस डिपो और किस रिटेल ठेके तक पहुंची है।
उपभोक्ता भी अपने मोबाइल फोन से बोतल पर लगे क्यूआर कोड और होलोग्राम को स्कैन कर सकेंगे। स्कैन करने पर यह जानकारी मिलेगी कि शराब कहां और किस तारीख को बनी है। इससे गुणवत्ता की पुष्टि करने में आसानी होगी और नकली उत्पाद की पहचान तुरंत की जा सकेगी। नई आबकारी नीति में शराब के ठेकों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना भी अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे बिक्री और स्टॉक की पारदर्शी निगरानी हो सके। आबकारी आयुक्त डॉ. यूनुस ने बताया कि वैध शराब की बिक्री सुनिश्चित होने से प्रदेश के राजस्व में वृद्धि होगी। बाहरी राज्यों से अवैध शराब की सप्लाई पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। सरकार की इस नई डिजिटल निगरानी व्यवस्था से प्रदेश में शराब कारोबार पर सख्त नियंत्रण के साथ पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
