विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर तीन बोगी वाले डीजल हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट ट्रेन सेट (डीएचएमयू कोच) का ट्रायल किया जा रहा है। यह ट्रेन सेट सोमवार को कालका से शिमला तक करीब छह घंटे में पहुंचा। इसमें तीन डिब्बे लगे हैं। इससे पहले दिसंबर 2023 में इस ट्रेन सेट का ट्रायल किया था। यह ट्रायल 5 दिसंबर तक चलेंगे।  कालका से ट्रेन सुबह 10:31 बजे शिमला के लिए रवाना हुई। इस दौरान धर्मपुर और सोलन में रूकी। इसके बाद शिमला की चढ़ाई में ट्रेन सेट को चलाया और खामियों का पता लगाया।

शिमला रेलवे स्टेशन पर ट्रेन सेट शाम 4:22 बजे पर पहुंचा। इससे पहले कालका से टकसाल पहुंचने में ही दो घंटे का समय लग जाता था। टकसाल रेलवे स्टेशन पहुंचने से पहले ही ट्रेन सेट का इंजन गर्म हो जाता था। इसे जांचने और अपग्रेड करने के बाद फिर से ट्रायल शुरू किए गए हैं। इस दौरान इसमें डिजाइन के अनुसार वजन के साथ कोचों के लदान का ट्रायल भी किया जाएगा। पूरी जांच के बाद रिपोर्ट रेल मंत्रालय को भेजी जाएगी। पहले दिन ट्रायल के दौरान कोई भी समस्या पेश नहीं आई।

ट्रेन सेट में तीन कोच लगे हैं। इसमें प्रति कोच 60 यात्री बैठ सकेंगे। इस ट्रेन सेट को इंजन रहित ट्रेन भी कहते हैं। यात्री गाड़ी से उतरे बिना ही एक कोच से दूसरे में जा सकते हैं। इन दिनों कालका-शिमला रेलमार्ग पर पांच ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। आने वाले दिनों में शिमला में सैलानियों की संख्या बढ़ना शुरू हो जाएगी। टॉय ट्रेन से बर्फबारी के दौरान शिमला की वादियों का मनमोहक नजारा दिखाई देता है जो सैलानियों को शिमला की ओर आकर्षित करता है।

आम ट्रेनों की बजाय डीएचएमयू कोच अधिक आवाज करता है। यह आवाज हर बोगी में रेडिएटर लगने के बाद आई है। इससे पहले इतनी आवाज किसी भी ट्रेन सेट में नहीं आती थी। कालका से शिमला तक हसीन वादियों से गुजरती इस ट्रेन में हर सैलानी सफर करना चाहता है। हर साल लाखों की तादाद में सैलानी ट्रेन के जरिये शिमला घूमने आते हैं।