हिमाचल प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी भले ही अभी समय हो लेकिन प्रदेश की राजनीति में अंदरखाते हलचल बढ़ने लगी है। विपक्षी दल भाजपा ने चुनावी रणनीति को धार देने के लिए प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया समय से पहले शुरू कर दी है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में इन दिनों व्यापक स्तर पर सर्वे कराया जा रहा है, इसके माध्यम से संभावित उम्मीदवारों को लेकर जनता की राय जानी जा रही है। पार्टी से जुड़े लोगों, आम मतदाताओं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों से फोन कॉल के माध्यम से संपर्क किया जा रहा है। कॉल के दौरान न केवल संभावित दावेदारों के बारे में फीडबैक लिया जा रहा है, बल्कि क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं, मौजूदा कांग्रेस सरकार के कामकाज और भाजपा नेतृत्व की स्वीकार्यता को लेकर भी सवाल पूछे जा रहे हैं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि सर्वे में टिकट के संभावित दावेदारों के नाम लेकर लोगों से उनकी प्राथमिकता पूछी जा रही है। कॉल करने वाली एजेंसी लोगों से एक से चार तक रैंकिंग देने को कह रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस नेता की क्षेत्र में सबसे अधिक स्वीकार्यता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस बार टिकट वितरण में स्थानीय समीकरणों और जनता की राय को अधिक महत्व देने की रणनीति पर काम कर रही है। पिछले चुनावों में कई सीटों पर टिकट आवंटन को लेकर असंतोष सामने आया था, जिसका असर चुनाव परिणामों पर भी पड़ा। ऐसे में पार्टी हाईकमान इस बार पहले से ही जमीनी स्थिति का आकलन कर संगठनात्मक स्तर पर रिपोर्ट तैयार करवा रहा है।

सर्वे केवल लोकप्रियता तक सीमित नहीं है। इसमें यह भी पूछा जा रहा है कि संबंधित नेता जनता के बीच कितना सक्रिय है, लोगों की समस्याओं को लेकर उसकी पहुंच कैसी है और क्षेत्र में उसकी छवि सकारात्मक है या नहीं। इसके अलावा स्थानीय विकास, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और पेयजल जैसी समस्याओं पर भी राय ली जा रही है। भाजपा के पुराने नेताओं, युवा चेहरों और हाल ही में सक्रिय हुए संभावित दावेदारों को लेकर अलग-अलग फीडबैक जुटाया जा रहा है। इससे पार्टी यह समझने की कोशिश कर रही है कि किस सीट पर नए चेहरे को मौका देना फायदेमंद रहेगा और कहां पुराने नेताओं पर दांव खेलना बेहतर होगा।

भाजपा का यह सर्वे केवल टिकट चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से पार्टी प्रदेश में कांग्रेस सरकार के प्रति जनता का रुझान भी समझना चाहती है। फोन कॉल में लोगों से सरकार की योजनाओं, कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों, महंगाई, बेरोजगारी और विकास कार्यों को लेकर भी सवाल पूछे जा रहे हैं। इससे भाजपा आगामी चुनावी मुद्दों की रूपरेखा तैयार करने में जुटी दिखाई दे रही है। पार्टी यह जानना चाहती है कि किन मुद्दों को लेकर जनता में सबसे ज्यादा नाराजगी है और किन क्षेत्रों में संगठन को अधिक मेहनत करने की जरूरत है।