हिमाचल प्रदेश में सेवानिवृत्ति के बाद दोबारा नियुक्त किए गए शिक्षकों के मानदेय भुगतान को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति को सरकार ने अब दूर कर दिया है। वित्त विभाग ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि ऐसे शिक्षकों को मानदेय किस मद से दिया जाएगा, यह उनकी पुनर्नियोजन की प्रकृति पर निर्भर करेगा। सैकड़ों शिक्षकों को सेवानिवृत्ति के बाद भी मानदेय नहीं मिल रहा है। सरकार ने चालू शैक्षणिक सत्र के दौरान शिक्षकों को सेवानिवृत्ति नहीं लेने का विकल्प दिया हुआ है। ऐसे में जिन शिक्षकों ने सेवानिवृत्त होने की जगह सेवाएं देने का फैसला लिया है, उन्हें अब मानदेय जारी होने की उम्मीद जगी है।

स्कूल शिक्षा निदेशक की ओर से इस संबंध में जिला उपनिदेशकों को पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। यह स्पष्टीकरण शिक्षा विभाग के उस पत्र के संदर्भ में जारी किया गया है जिसमें सेवानिवृत्ति के बाद शैक्षणिक सत्र के अंत तक दोबारा नियुक्त शिक्षकों के मानदेय भुगतान के तरीके को लेकर मार्गदर्शन मांगा गया था। वित्त विभाग ने मामले की जांच के बाद कहा कि यदि किसी शिक्षक को सेवानिवृत्ति के बाद उसी नियमित बजट वाले पद पर पुनर्नियोजित किया गया है, जिस पद पर वह सेवानिवृत्ति से पहले कार्यरत था, तो उसका वेतन, मानदेय सामान्य वेतन मद से ही आहरित किया जा सकता है।

इसके विपरीत यदि किसी शिक्षक को आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत पुनर्नियोजित किया गया है और वह नियमित स्वीकृत पद के विरुद्ध कार्य नहीं कर रहा है, तो ऐसे मामलों में मानदेय का भुगतान आउटसोर्सिंग व्यय मद से किया जाएगा। शिक्षा विभाग के विभिन्न कार्यालयों में सेवानिवृत्त शिक्षकों को दोबारा लगाने के मामलों में मानदेय किस मद से जारी किया जाए, इसे लेकर असमंजस बना हुआ था। कई जिलों में इस कारण भुगतान प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही थी। वित्त विभाग के स्पष्टीकरण के बाद अब इस संबंध में एक समान व्यवस्था लागू हो सकेगी और भुगतान में आ रही दिक्कतें दूर होने की उम्मीद है। उच्च शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने जिला उपनिदेशकों को निर्देश दिए हैं कि वित्त विभाग के निर्देशों के अनुरूप मामले में तुरंत आगे की आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस संदर्भ में की गई कार्रवाई की जानकारी भी जल्द विभाग को उपलब्ध कराने को कहा गया है।