नौसेना के पूर्व सैनिक का चार पेज का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें पारिवारिक कलह का जिक्र किया है। सुसाइड के नोट के अंत में परिजनों के लिए लिखा है कि मैं जा रहा हूं। मेरी परवाह मत करना। मेरी मौत का जिम्मेदार कोई नहीं है।


सुसाइड नोट में पूर्व सैनिक ने खुद को ईमानदार व्यक्ति बताया है। साथ ही काम के प्रेशर के बारे भी लिखा है। सुसाइड नोट में लिखा है कि पत्नी बच्चों को मारती थी। वह इसे बारे में मना भी करता था। पिता के साथ भी चल रहे विवादों को लेकर सुलह नहीं हो पा रही है। वह समय से कार्यालय जाता था। समय पर काम करता था। बावजूद इसके कार्य स्थल में बहुत दवाब है। उधर, पुलिस ने सुसाइड को नोट कब्जे लेकर जांच शुरू कर दी है। हैंडराइटिंग विशेषज्ञों से सुसाइड नोट की जांच कराई जाएगी।

पूर्व सैनिक की लिखावट से सुसाइड नोट की लिखावट को मैच किया जाएगा। पुलिस प्रारंभिक जांच में मामले को आत्महत्या का ही मान रही है। हालांकि अन्य पहलुओं को भी देखा जा रहा है। बता दें कि गुरुवार रात को घुमारवीं के बल्लू में नौसेना के पूर्व सैनिक विपन ठाकुर निवासी गांव भपराल का शव उनकी ही कार में मिला था। मुंह पर हीलियम गैस के सिलिंडर से जुड़ा ऑक्सीजन मास्क लगा था। उस पर पॉलिथीन का लिफाफा और सेलो टेप लिपटा हुआ था। विपन वर्तमान में मोरसिंघी स्थित एसबीआई के बैंक में कार्यरत था। वह घुमारवीं शहर में दो बच्चों और पत्नी के साथ क्वार्टर में रहते थे। उनकी इस तरीके की मौत से क्षेत्र में सनसनी फैली हुई है।   लोग बस यही सवाल कर रहे कि आर्थिक और पारिवारिक रूप से संपन्न एक व्यक्ति को इस तरीके से मरने का क्या वजह बनी। फिलहाल, पुलिस मामले की हर पहलुओं जांच कर रही है।

 घुमारवीं के बल्लू में शुक्रवार को कार में नौसेना के पूर्व सैनिक का शव मिला, लेकिन इसमें सबसे चौकाने वाली बात यह थी कि गाड़ी में हीलियम गैस का सिलिंडर मिला। इससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि मौत को दर्द रहित बनाने के लिए पूर्व जवान ने इस गैस का उपयोग किया। प्रदेश में इस तरह का यह पहला मामला है। बताते चलें कि विशेषज्ञों के अनुसार हीलियम गैस सांस लेने पर शरीर में ऑक्सीजन की जगह ले लेती है। इस प्रक्रिया में व्यक्ति को घुटन का अहसास नहीं होता और कुछ ही मिनटों में बेहोशी आ जाती है। यही वजह है कि विदेशों में इच्छा मृत्यु समर्थक संगठनों में इस पर काफी चर्चा होती रही है। हालांकि, भारत में यह तरीका बेहद दुर्लभ है और कानून के तहत आत्महत्या या उसकी कोशिश का अपराध मानी जाती है। देश में इस तरीके से हुई मौत का पहला मामला 2020 में कोलकाता में सामने आया था। इसके बाद 2024 में बेंगलुरु में और हाल ही में दिल्ली में भी ऐसा मामला दर्ज हुआ। बिलासपुर का मामला देश की इस सूची में चौथे नंबर पर है, और प्रदेश में पहला है, जिसने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है। 

विपन की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस हत्या और आत्महत्या के पहलुओं से जांच कर रही है। विपन के पिता भपराल पंचायत के प्रधान हैं। परिजनों ने मांग की है कि विपन की मौत का सच सामने आना चाहिए। हाईवे और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जाए। विपन के साथ किसी अन्य की मौजूदगी की जांच की जाए। हीलियम गैस सिलिंडर की खरीद और स्रोत का पता लगाया जाए। उधर, विपन के साथ रहने वाले लोगों का कहना है कि घटना के कई घंटे पहले तक वह सामान्य थे। उनकी बातचीत में ऐसा कोई संकेत नहीं था कि वह तनाव में हैं।