
बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले के धन शोधन मामले के आरोपी कालाअंब स्थित हिमालयन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस (एचजीपीआई) के एमडी रजनीश बंसल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष अदालत ने उद्घोषित फरार अपराधी घोषित कर दिया है। अब प्रवर्तन निदेशालय रजनीश बंसल की संपत्ति को नीलाम कर सकेगा। लगातार समन और उद्घोषणा जारी होने के बावजूद अदालत में पेश न होने के चलते यह आदेश पारित किया है।
उद्घोषणा की प्रतियां आरोपी के कुरुक्षेत्र स्थित निवास, नाहन के अंब स्थित हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट और शिमला अदालत के नोटिस बोर्ड पर चस्पां की गईं थीं। इसके बावजूद बंसल अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने माना कि आरोपी न्यायालय की कार्यवाही से जानबूझकर बच रहा है। इसलिए उसे फरार घोषित किया गया है।
अदालत ने आदेश दिया है कि बंसल का नाम प्रवर्तन निदेशालय के फरार आरोपियों के रजिस्टर में दर्ज किया जाए। हिमाचल में अधिकारियों की मिलीभगत से कई निजी विश्वविद्यालय संचालकों ने करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति का घोटाला किया है। इसी मामले में सीबीआई ने 7 मई, 2019 को रजनीश बंसल व अन्य आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति हड़पने के मामले में सीबीआई ने 7 मई, 2019 को रजनीश बंसल व अन्य आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।
8 अप्रैल 2024 को सीबीआई ने रजनीश को गिरफ्तार किया था। बाद में उसे कोर्ट से जमानत मिल गई। ईडी के मुताबिक मामले की पूछताछ के लिए रजनीश के खिलाफ करीब पांच समन जारी किए गए थे। अंतिम वारंट पर 6 फरवरी 2025 को रजनीश ईडी के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। ईडी ने 29 जनवरी, 2025 को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत रजनीश के पंचकूला घर में रेड की थी और उसके भाई को गिरफ्तार किया था, जो इस समय जेल में है।
ईडी के शिकंजे से बचने के लिए बीते दिनों रजनीश की ओर से लगाई गई अंतरिम जमानत याचिका को भी अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद ईडी ने रजनीश के खिलाफ पीएमएलए, 2002 की धारा 4 के तहत दंडनीय अपराध के लिए गैर जमानती वारंट जारी करने के लिए अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया था। गत 12 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने रजनीश बंसल के खिलाफ ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया था।
कथित अपराध वर्ष 2014-15 का है। 16 नवंबर 2018 को पुलिस थाना छोटा शिमला में आरोपी अरविंद राज्टा सहित अन्य के खिलाफ मामला पंजीकृत किया गया था। 7 मई 2019 को यह मामला जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया गया। इस बीच 19 जुलाई 2019 से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामले की जांच कर रहा है।
