हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने किन्नौर के शौंगटोंग परियोजना से प्रभावित पोवारी गांव के लोगों के अधिकारों के संरक्षण पर सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी किए हैं। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने इस मामले में सभी प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत से इस मामले में अंतिम रोक की मांग की थी लेकिन अदालत अगली सुनवाई को अंतरिम रोक पर फैसला करेगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गई है कि ग्राम पंचायत पोवारी की जो अतिरिक्त भूमि कंपनी की ओर से अधिग्रहित की गई है, उसके लिए उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। भारत सरकार के मंत्रालय की ओर से भी बताया गया है कि एफआरए के तहत इनके परंपरागत अधिकारों को सुरक्षित किया जाए। अनुसूचित जनजाति और वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत ग्रामिणों के अधिकारों को सुरक्षित रखा जाता है। मंजूरी के लिए संबंधित ग्राम पंचायत से एनओसी लेना पड़ता है।