हमीरपुर के सुजानपुर नगर परिषद में प्लास्टिक कचरे के परिवहन को लेकर ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मामला सुजानपुर से अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट बाघा तक प्लास्टिक रिसाइक्लिंग सामग्री पहुंचाने से जुड़ा है, जहां ऑडिट के अनुसार परिवहन के लिए एक निजी फर्म को 1,56,016 रुपये का भुगतान किया गया।
ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, 8 दिसंबर 2023 को अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड और हिमाचल प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों के बीच हुए समझौते में प्रावधान था कि सीमेंट की सप्लाई के बाद लौटने वाले ट्रकों की खाली क्षमता का इस्तेमाल प्लास्टिक कचरे को वापस ले जाने के लिए किया जाएगा और इसके लिए नगर निकाय से परिवहन शुल्क नहीं लिया जाना था।
इसके बावजूद नगर परिषद सुजानपुर ने प्लास्टिक कचरे की ढुलाई के लिए निविदा आमंत्रित की। निविदा में परिवहन की दर 9,950 रुपये प्रति ट्रिप तय की गई थी। इसके तहत 14 चक्करों के लिए 1,39,300 रुपये का भुगतान बनता था। इसके ऊपर 12 प्रतिशत जीएसटी के रूप में 16,716 रुपये जोड़कर कुल 1,56,016 रुपये का भुगतान किया गया।
ऑडिट ने इस भुगतान पर आपत्ति जताते हुए इसे नगर परिषद पर अनावश्यक और अनधिकृत वित्तीय भार बताया है और राशि की वसूली की बात कही है। अतिरिक्त जीएसटी के भुगतान को लेकर भी ऑडिट में सवाल उठाया गया है।
अल्ट्राटेक के वाहनों से ही भेजा गया था कचरा
ऑडिट के दौरान नगर परिषद की ओर से अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड को भेजे गए पत्रों की भी जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार, इन पत्रों में उल्लेख था कि प्लास्टिक कचरा अल्ट्राटेक के प्लांट की ओर से उपलब्ध करवाए गए वाहनों में ही भेजा गया।
28 अगस्त से 22 नवंबर 2024 के बीच भेजे गए 14 पत्रों में संबंधित वाहनों के नंबर भी दर्ज थे। ऐसे में ऑडिट ने परिवहन भुगतान को लेकर सवाल उठाए हैं।
मामला 19 नवंबर 2025 को अंकेक्षण अधियाचना के माध्यम से नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी के ध्यान में भी लाया गया था। हालांकि, ऑडिट समाप्त होने तक नगर परिषद की ओर से इसका जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया था।
वहीं, नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी हर्षित शर्मा ने बताया कि सीमेंट प्लांट कई बार चालू नहीं होता, ऐसी स्थिति में परिषद के पास वैकल्पिक व्यवस्था के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। उनके अनुसार, जब प्लास्टिक कचरा अधिक हो जाता है तो ऐसी व्यवस्था करनी पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली का कनेक्शन न होने के कारण प्लास्टिक सामग्री को परिवहन योग्य बनाने में भी दिक्कत आती है।
अब इस मामले में ऑडिट की आपत्तियों और नगर परिषद की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर रहेगी।