
प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ओपीएस में नए कर्मचारी-अधिकारियों को जोड़ने पर विचार कर रही है। ओपीएस कर्मचारियों का हक है और प्रदेश सरकार उसे कर्मचारियों को जीवन भर देगी।
सीएम ने कहा कि नीट पेपर लीक मामला केद्र सरकार का सबसे बड़ा घोटाला है। इसके जिम्मेवार कौन है। गलतियां करने वाली भाजपा हमसे सवाल पूछ रही है। बुधवार को विधानसभा क्षेत्र धर्मशाला में विभिन्न योजनाओं के शिलान्यास उद्धाटन और जिला कांगड़ा में नवनिर्वाचित प्रधानों-उपप्रधानों के शपथ दिलाने पहुंचे मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि नीट जैसे पेपर का सबसे बड़ा घोटाला करने वाली भाजपा सरकार राहुल गांधी की लोकप्रियता से डरकर कांग्रेस के खिलाफ अनाप शनाप बोल रही है।
हमारी सरकार सारे पेपर राज्य चयन आयोग के माध्यम से करवा रही है। वहीं, कांगड़ा जिले के धर्मगिरि-पठियार स्थित महाराणा प्रताप इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में महाराणा प्रताप की 487वीं जयंती पर समारोह में सीएम ने कहा कि प्रदेश ने शत-प्रतिशत साक्षरता हासिल कर देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। राज्य में 500 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजनाएं और ग्रीन पंचायत कार्यक्रम रोजगार के नए अवसर सृजित करेंगे।
स्वास्थ्य अधोसंरचना के आधुनिकीकरण और नई मशीनों की स्थापना के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है, जिससे लोगों को बेहतर उपचार के लिए प्रदेश से बाहर नहीं जाना पड़ रहा।
नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने जनसहभागिता से ‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल अभियान’ शुरू किया है। आगामी ‘खेलो इंडिया चिट्टा-मुक्त अभियान’ के माध्यम से युवाओं को खेलों और स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित किया जाएगा।
बारह साल की अवधि पूरी कर चुकीं जल विद्युत परियोजनाओं में रॉयल्टी बढ़ाए केंद्र
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय ऊर्जा और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर से दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में मुफ्त बिजली रॉयल्टी बढ़ाने का मामला उठाया। उन परियोजनाओं में 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी बढ़ाने का अनुरोध किया, जिनकी उपक्रमों में प्रारंभिक 12 वर्षों की अवधि पूरी हो चुकी है। उन्होंने 180 मेगावाट की बैरा-स्यूल जलविद्युत परियोजना में 44 वर्ष पूरे होने पर मुफ्त बिजली की हिस्सेदारी 50 फीसदी करने की मांग भी की।
बीबीएमबी की परियोजनाओं के 7,784 करोड़ रुपये के बकाया ऊर्जा भुगतान का मुद्दा उठाया। राज्य को देय ऊर्जा बकाया भुगतान में हो रहे विलंब पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के निर्माण से हजारों लोग विस्थापित हुए और राज्य को पर्यावरणीय प्रभावों का सामना करना पड़ा। उन्होंने शानन जलविद्युत परियोजना पर राज्य के वैध अधिकार का भी पक्ष रखा।
कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बांध परियोजना का मार्ग प्रशस्त हुआ है। कड़छम- वांगतू जलविद्युत परियोजना की रॉयल्टी से जुड़े मामले में उच्चतम न्यायालय के हिमाचल प्रदेश के पक्ष में आए फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी। सीएम ने क्लीन हिली एंड हिमालयन सिटीज इनिशिएटिव के लिए 12.33 करोड़ रुपये जारी करने का अनुरोध किया। उन्होंने अमृत योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं के लिए शेष 64.45 करोड़ रुपये जारी करने की भी मांग की।
