हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के जुब्बल तहसील के झड़ग गांव में 54 साल बाद शांत महायज्ञ अनुष्ठान देवी-देवताओं के आगमन के साथ गुरुवार से शुरू हो गया है। हाटकोटी से दुर्गा माता देवलुओं के साथ झड़ग गांव में आयोजित हो रही शांत में शामिल होने के लिए पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ रवाना हुईं। अनुष्ठान तीन दिन तक चलेगा। खूंदों के साथ देवी-देवता महायज्ञ में पहुंचे हैं। अनुष्ठान में हजारों लोगों के आने की संभावना है।

वहीं, यातायात व्यवस्था के लिए जगह-जगह पुलिस के जवान तैनात कर दिए गए हैं। अनुष्ठान के दौरान बूंदों और आम लोगों पर अस्त्र-शस्त्र के साथ नाचने और साथ लाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। पहले लोग शांत अनुष्ठान में अस्त्र-शस्त्र के साथ नाचने में अपनी शान समझते थे। इस बार झड़ग गांव में प्रशासन ने सख्ती की है। जुब्बल के एसडीएम गुरमीत नेगी ने बताया कि शांत महायज्ञ का आयोजन बड़े हर्षोल्लास के साथ किया जा रहा है। 6 दिसंबर तक होने वाले इस अनुष्ठान के सुचारु संचालन और क्षेत्र में शांति, व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आम नागरिकों को दिशा-निर्देशों का पालन करना पड़ेगा। उन्होंने आग्रह किया कि शांत महायज्ञ के दौरान प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का लोग पालन करें। किसी भी प्रकार के हथियार बंदूक, धारदार अस्त्र-शस्त्र और खतरनाक वस्तुएं लेकर आने पर प्रतिबंध है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस और प्रशासनिक टीमें सक्रिय रहेंगी। उत्पात करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने जनता और श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि पार्किंग, यातायात और सुरक्षा से संबंधित सभी निर्देशों का पालन करें। यातायात प्रशासन और पुलिस की ओर से दर्शाए गए भागों, पार्किंग स्थलों और बैरियरों की सम्मानपूर्वक अनुपालन करें। 

इससे पहले बुधवार सुबह 4:00 बजे झोऊटा गांव के खूंद ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर में पहुंचे। सुबह कपाट खुलने से पहले पटाखे के धमाकों के साथ उन्होंने शिरकत की। इसके बाद मंदिर कमेटी ने स्वागत किया। अनुष्ठान में अपनी पारंपरिक भूमिका निभाने के बाद मंदिर प्रांगण में कपाट खुलने तक खूंदों ने नाटी डाली। मंदिर के गर्भगृह में बीते एक सप्ताह से हवन चल रहा है। मंदिर के प्रमुख राय लाल मेहता ने बताया कि सभी तैयारियां पूरी हैं। इसके बाद वीरवार को खूंदों का स्वागत होगा। शुक्रवार को शिखा पूजन और फेर की मुख्य रस्म होगी।