हिमाचल प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के तबादलों की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा सुधार लागू किया है। अब किसी भी कर्मचारी का तबादला उसकी पिछली तीन पोस्टिंग के क्षेत्रों, वहां बिताए गए कार्यकाल और वर्तमान स्टेशन की श्रेणी के आधार पर ही किया जाएगा। इस संबंध में कार्मिक विभाग ने अधिसूचना जारी करते हुए तबादलों से जुड़े व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत 2013 में नया प्रावधान जोड़ा है। आवेदन के साथ परफार्मा जमा करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना परफार्मा के तबादला आदेश जारी करना अवैध माना जाएगा। आदेशों का उल्लंघन करने वाले  अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। 

कार्मिक सचिव की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, जिला उपायुक्तों, मंडलायुक्तों और निगम बोर्ड के प्रबंध निदेशकों को पत्र जारी किया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी कर्मचारी के तबादले के लिए ट्रांसफर परफार्मा को आवेदन के साथ अनिवार्य रूप से संलग्न करना होगा। इसमें अधिकारी या कर्मचारी को अपनी पिछली तीन नियुक्तियों का पूरा विवरण, प्रत्येक स्थान पर बिताए गए वर्ष-महीनों की अवधि, वर्तमान तैनाती की श्रेणी (कठिन, सामान्य या दूरस्थ क्षेत्र) तथा प्रस्तावित स्थान का उल्लेख करना होगा। कार्मिक सचिव ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य मनमाने तबादलों पर अंकुश लगाना और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। अधिकारियों को अब यह स्पष्ट करना होगा कि किसी कर्मचारी को स्थानांतरित करने की क्या प्रशासनिक या सार्वजनिक आवश्यकता है और क्या उसने संबंधित स्थान पर न्यूनतम कार्यकाल पूरा किया है या नहीं। 

उन्होंने कहा कि नई प्रणाली से कर्मचारियों में समान अवसर की भावना को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अक्सर यह शिकायतें आती थीं कि कुछ अधिकारी वर्षों तक एक ही क्षेत्र में तैनात रहते हैं जबकि अन्य को बार-बार बदला जाता है। अब हर तबादले के पीछे एक दस्तावेजी तर्क होगा, जो पूरे सिस्टम को जवाबदेह बनाएगा। परफार्मा तबादले के रिकॉर्ड का हिस्सा रहेगा और किसी भी समय ऑडिट या जांच के दौरान प्रस्तुत किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत 2013 हिमाचल प्रदेश सरकार की प्रमुख नीति है जो कर्मचारियों के स्थानांतरण, कार्यकाल, कठिन क्षेत्र नीति और प्रशासनिक औचित्य को परिभाषित करती है।