
हिमाचल प्रदेश में मई के दूसरे सप्ताह में भी ठंड बरकरार है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने से प्रदेश के कई हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से 5 से 10 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चल रहा है।
मई महीने में पहाड़ों पर हिमपात और मैदानी इलाकों में बारिश ने पारा थाम दिया है। प्रदेश के मैदानी इलाकों ऊना, हमीरपुर, कांगड़ा, बिलासपुर में इन दिनों पारा 40 के आसपास रहता था, इस बार माैसम खराब रहने से तापमान 35 से नीचे बना है। वहीं राजधानी शिमला में इन दिनों पारा 30 डिग्री के आसपास रहता था। शिमला समेत पहाड़ी इलाकों में सुबह-शाम लोगों को गर्म कपड़े पहनने पड़ रहे हैं। शनिवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहा।
उधर, मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार प्रदेश में अभी गर्मी बढ़ने के आसार नहीं हैं। रविवार को हिमाचल में मौसम साफ रहेगा, लेकिन 11 से 15 मई तक प्रदेश के अधिकांश भागों में बारिश, अंधड़ और ओलावृष्टि का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने इस दौरान कई जिलों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया गया है।
मध्य और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने 11 मई को चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला के लिए येलो जबकि 12 और 13 मई को कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला के लिए ऑरेंज व अन्य जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी हुआ है। 14 और 15 मई को भी मौसम खराब रहने के आसार हैं।
यह रहा अधिकतम तापमान
| ऊना | 34.0 |
| सुंदरनगर | 32.4 |
| कांगड़ा | 32.3 |
| बरठीं | 31.8 |
| मंडी | 31.2 |
| भुंतर | 30.5 |
| ऊना | 34.0 |
| सुंदरनगर | 32.4 |
| कांगड़ा | 32.3 |
| बरठीं | 31.8 |
| मंडी | 31.2 |
| भुंतर | 30.5 |
कई शहरों में अधिकतम तापमान काफी नीचे
हिमाचल प्रदेश के कई शहरों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया गया है। शिमला, कुफरी, केलांग, कल्पा, मनाली और डलहौजी जैसे पर्यटन स्थलों पर दिन के समय भी हल्की ठंड महसूस की जा रही है। ऊंचाई वाले जिलों में न्यूनतम तापमान सात डिग्री से नीचे बना हुआ है। सुबह-शाम के समय ठंडी हवाओं के कारण लोगों को फिर सर्दियों जैसे हालात महसूस हो रहे हैं। पर्यटन स्थलों पर पहुंचे पर्यटक भी मौसम के इस बदले रंग का आनंद ले रहे हैं। बदलते मौसम ने किसानों और बागवानों की चिंता भी बढ़ा दी है। सेब उत्पादक क्षेत्रों में ओलावृष्टि की आशंका को लेकर बागवान सतर्क हैं। तेज हवाओं और बारिश से फलदार पौधों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना है।
