
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जेबीटी शिक्षकों की वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़ी याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि आर्ट्स, मेडिकल और नॉन-मेडिकल स्ट्रीम के जेबीटी शिक्षकों को एक समान कैडर नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि इनकी शैक्षणिक योग्यताएं और कैडर अलग-अलग हैं।
न्यायाधीश रंजन शर्मा की अदालत ने खत्री राम और अन्य की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैधानिक नियमों के तहत जेबीटी सीधे हेडमास्टर पद के लिए फीडर कैटेगरी नहीं हैं। हेडमास्टर पद पर पदोन्नति के लिए टीजीटी शिक्षक फीडर कैटेगरी में आते हैं।
24 JBT शिक्षकों ने दायर की थी याचिका
याचिकाकर्ताओं सहित 24 जेबीटी शिक्षकों ने मांग की थी कि टीजीटी पद पर पदोन्नति के बाद उनकी वरिष्ठता मूल जेबीटी वरिष्ठता सूची के आधार पर तय की जाए, चाहे पदोन्नति किसी भी तारीख को हुई हो।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की थी कि साइंस स्ट्रीम के जूनियर जेबीटी शिक्षकों को पहले टीजीटी पद पर पदोन्नति मिलने के कारण उन्हें भी उसी तारीख से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ दिया जाए।
हालांकि, अदालत ने इन मुख्य मांगों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि आर्ट्स, मेडिकल और नॉन-मेडिकल स्ट्रीम के जेबीटी शिक्षक एक ही सेवा के भीतर अलग-अलग कैडर का हिस्सा हैं। इसलिए पदोन्नति के लिए सभी जेबीटी शिक्षकों की वरिष्ठता सूची को एकल इकाई नहीं माना जा सकता।
बिना विषय की जानकारी के दूसरी स्ट्रीम में पदोन्नति पर टिप्पणी
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि संबंधित विषय की पर्याप्त जानकारी के बिना किसी शिक्षक को दूसरी स्ट्रीम के पद पर पदोन्नत करने की अनुमति देने से शिक्षा व्यवस्था में कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं।
हालांकि, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि यदि याचिकाकर्ताओं का अभी तक टीजीटी आर्ट्स के पद पर प्रमोशन नहीं हुआ है, तो संबंधित अधिकारी कानून के अनुसार उनके पदोन्नति के मामले की समीक्षा करें।
बिजली जुर्माने पर भी हाईकोर्ट का अहम फैसला
इसी सुनवाई से जुड़े हाईकोर्ट के एक अन्य फैसले में बिजली उपभोक्ताओं से संबंधित महत्वपूर्ण बात सामने आई है। अदालत ने कहा कि विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 126 के तहत अनधिकृत बिजली उपयोग का जुर्माना लगाने से पहले संबंधित परिसर का भौतिक निरीक्षण करना जरूरी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर सीधे पेनल्टी या असेसमेंट ऑर्डर जारी नहीं किया जा सकता।
मामले में बिजली बोर्ड ने नालागढ़ की एक फर्म पर 1.65 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया था। बोर्ड का आरोप था कि फर्म ने स्वीकृत लोड से अधिक बिजली का इस्तेमाल किया। बाद में अपीलीय प्राधिकरण ने यह जुर्माना रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखा।
विवाह के ढोंग पर भी हाईकोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में कहा कि महिला के साथ वैवाहिक संबंध का दावा या विवाह का ढोंग कर उसके साथ क्रूरता करने वाले व्यक्ति के खिलाफ धारा 498-ए के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने इस आधार पर एफआईआर रद्द करने की मांग को खारिज कर दिया कि विवाह कानूनी रूप से वैध नहीं था।
इस तरह हिमाचल हाईकोर्ट के हालिया फैसलों में शिक्षकों की पदोन्नति, बिजली उपभोक्ताओं पर जुर्माने और वैवाहिक क्रूरता से जुड़े मामलों पर महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणियां सामने आई हैं।
