
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंद्रनगर से ताल्लुक रखने वाले धावक सावन बरवाल ने एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। सावन ने पुरुषों की मैराथन में रजत पदक अपने नाम कर भारत का मान बढ़ाया।
सावन ने 42.195 किलोमीटर की मैराथन 2 घंटे 11 मिनट 36 सेकंड में पूरी की। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड और बेहतर कर दिया।
इससे पहले इसी साल अप्रैल में रॉटरडैम मैराथन में सावन ने 2 घंटे 11 मिनट 58 सेकंड का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने 1978 से कायम शिवनाथ सिंह के 2 घंटे 12 मिनट के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था।
44 साल बाद भारत को मिला मैराथन पदक
सावन बरवाल की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इससे एशियाई खेलों में पुरुष मैराथन पदक के लिए भारत का 44 साल लंबा इंतजार खत्म हुआ है। इससे पहले भारत ने 1982 के दिल्ली एशियाई खेलों में पुरुष मैराथन में पदक जीता था।
सावन एशियाई खेलों के इतिहास में मैराथन पदक जीतने वाले भारत के चौथे धावक बन गए हैं।
आखिरी चरण तक बना रहा रोमांच
दौड़ के दौरान सावन लगातार पदक की स्थिति में बने रहे। 21 किलोमीटर के पड़ाव पर वह दूसरे स्थान पर थे और 35 किलोमीटर तक उन्होंने अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी।
दौड़ के अंतिम चरण में जापान के इचिटाका यामाशिता ने बढ़त बना ली और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बावजूद सावन ने अपनी रफ्तार बनाए रखी और शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक पक्का कर लिया।
इस मुकाबले में जापान के इचिटाका यामाशिता ने स्वर्ण, भारत के सावन बरवाल ने रजत और चीन के फेंग पेइयू ने कांस्य पदक जीता।
जोगिंद्रनगर और मंडी में खुशी का माहौल
सावन बरवाल की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से उनके गृह क्षेत्र जोगिंद्रनगर के साथ-साथ पूरे मंडी जिले में खुशी का माहौल है। उनके पहले खेल प्रशिक्षक गोपाल ठाकुर ने भी सावन की इस उपलब्धि पर खुशी जताई है।
राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने के बाद अब एशियाई खेलों में रजत पदक जीतकर सावन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल और भारत का नाम रोशन किया है।
