
हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां साइबर ठगों ने एक महिला को करीब सात दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर अपने जाल में फंसाए रखा और उससे करीब 15 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने महिला को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में फंसाने का डर दिखाया था।
जानकारी के अनुसार, महिला को फोन के माध्यम से आरोपियों ने संपर्क किया और खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताया। बातचीत के दौरान उसे बताया गया कि उसके नाम से किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि सामने आई है और उसका संबंध मनी लॉन्ड्रिंग से हो सकता है।
इसके बाद आरोपियों ने महिला पर लगातार दबाव बनाया। उसे डराया गया कि अगर उसने निर्देशों का पालन नहीं किया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसी डर के चलते महिला कई दिनों तक आरोपियों के बताए तरीके से ही चलती रही।
बताया जा रहा है कि महिला को करीब सात दिनों तक डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा गया। इस दौरान आरोपी वीडियो कॉल और फोन के जरिए उस पर नजर रखते रहे और उसे किसी अन्य व्यक्ति से मामले की जानकारी साझा न करने के लिए कहा गया।
मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसने के डर से महिला ने आरोपियों के कहने पर अलग-अलग माध्यमों से करीब 15 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उसे ठगी का एहसास हुआ तो उसने मामले की शिकायत पुलिस से की।
पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर ठगी के इस पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। पुलिस की ओर से लोगों से अपील की गई है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन पर डरकर पैसे ट्रांसफर न करें। कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को इस तरह ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती।
साइबर ठग इन दिनों पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर लोगों को डराने का तरीका अपना रहे हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत परिजनों और पुलिस को सूचना देना जरूरी है।
