हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सेना के लिए ड्रोन बनाने और करोड़ों रुपये की ग्रांट मिलने के दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजकीय बहुतकनीकी संस्थान बड़ू के छात्र सर्वेश शर्मा को भारतीय सेना के लिए ड्रोन विकसित करने के नाम पर 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने की खबर चर्चा में थी। हालांकि, अब डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (DIO) ने स्पष्ट किया है कि उसके आधिकारिक रिकॉर्ड में छात्र या उससे जुड़े किसी स्टार्टअप को ऐसी कोई ग्रांट मंजूर होने की जानकारी नहीं है।

इस मामले में कथित ऑनलाइन धोखाधड़ी की आशंका के चलते सदर थाना हमीरपुर में एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं, हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग ने भी जांच शुरू कर संस्थान प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

क्या था 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट का मामला?

सितंबर 2026 में सर्वेश शर्मा की ओर से सेना के लिए स्वदेशी ड्रोन विकसित करने के वास्ते 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने का दावा सामने आया था। उनकी परियोजना का नाम ‘रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ बताया गया था। इस दावे के बाद छात्र की उपलब्धि की चर्चा हुई और उन्हें कई प्रमुख लोगों की ओर से सम्मानित भी किया गया था।

बताया गया था कि छात्र ने अपनी कंपनी बनाकर कुछ अन्य विद्यार्थियों को भी परियोजना से जोड़ा था। ग्रांट मिलने पर उन्हें वेतन देने की बात भी सामने आई थी।

DIO ने आधिकारिक रिकॉर्ड को लेकर क्या कहा?

28 अक्टूबर को डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन ने स्पष्ट किया कि उसके रिकॉर्ड के अनुसार सर्वेश शर्मा या उनसे जुड़े किसी स्टार्टअप को 3.5 करोड़ रुपये की ऐसी कोई ग्रांट मंजूर नहीं की गई है।

इस स्पष्टीकरण के बाद कथित ग्रांट से जुड़े दस्तावेजों और संचार की प्रामाणिकता पर सवाल उठने लगे। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई कि कथित फर्जी दस्तावेजों और डिजिटल संदेशों के माध्यम से छात्र को ग्रांट मंजूर होने का विश्वास दिलाया गया हो सकता है। हालांकि, इस पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान और घटनाक्रम की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

कॉलेज की शिकायत पर FIR दर्ज

कॉलेज के प्राचार्य की शिकायत पर सदर थाना हमीरपुर में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 319 और 336(3) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C और 66D के तहत कार्रवाई की है।

पुलिस कथित ग्रांट से जुड़े दस्तावेजों, 40 पन्नों के अनुबंध, इलेक्ट्रॉनिक पत्राचार और डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित दस्तावेज कहां से आए और इस मामले में कौन-कौन शामिल हो सकता है।

हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरकर घायल हुआ छात्र

इस मामले के बीच सर्वेश शर्मा हॉस्टल की तीसरी मंजिल पर स्थित अपने कमरे की बालकनी से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे उपचार के लिए पीजीआई चंडीगढ़ ले जाया गया, जहां उसके जबड़े की सर्जरी की गई। उसकी टांग में भी कई फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, छात्र ने इसे गलती से गिरने की घटना बताया है। हालांकि, पुलिस घटना के कारणों और अन्य परिस्थितियों की भी जांच कर रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि छात्र किन परिस्थितियों में गिरा था।

अब जांच में सामने आएंगे कई अहम तथ्य

3.5 करोड़ रुपये की कथित ग्रांट का दावा, DIO का आधिकारिक खंडन, एफआईआर और छात्र के घायल होने की घटना ने इस पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। पुलिस दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है, जबकि तकनीकी शिक्षा विभाग ने भी संस्थान से रिपोर्ट मांगी है।

अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित ग्रांट से जुड़े दस्तावेज किसने तैयार किए, छात्र तक वे कैसे पहुंचे और इस पूरे घटनाक्रम में किन लोगों की भूमिका रही। फिलहाल मामले में किसी की जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय नहीं किया गया है।