शिमला शहर के निजी स्कूलों के लिए चलाई जा रही हिमाचल पथ परिवहन निगम(एचआरटीसी) की चार्टेड बसों के किराये में कम कर दी गई है। इससे विद्यार्थियों को कुछ राहत मिली है। शनिवार को उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने पत्रकार वार्ता में इसकी जानकारी दी। मुकेश ने कहा कि एचआरटीसी की ओर से चार्टेड बसों का जो किराया तय किया गया था, उस पर अभिभावकों ने आपत्ति जताई थी और किराये को कम करने की मांग उठाई थी। बच्चों की मांग को देखते हुए एचआरटीसी अधिकारियों के साथ बैठक के बाद चार्टेड बसों के किराये को कम करने का फैसला लिया गया है।

उन्होंने कहा कि पहले 0 से पांच किलोमीटर दूरी के 1800 रुपये किराया तय हुआ था, लेकिन अब 0 से छह किलोमीटर के लिए 1200  रुपये प्रति माह लिए जाएंगे। इसी तरह दूसरे स्लैब में अब 2500 रुपये की बजाय 1800 रुपये    प्रति माह चुकाने होंगे। किलोमीटर भी छह से 12 किया गया है। पहले यह पांच से 10 किलोमीटर था। इसमें अधिकतर बच्चे कवर हो जाएंगे। जो इसमें कवर नहीं होंगे, उनके लिए 2 हजार प्रति माह रुपये तय किए गए हैं। मुकेश ने कहा कि स्कूल बसों से एचआरटीसी को 4 करोड़ रुपये का घाटा होता है। शहर में करीब 42 समर्पित बसें एचआरटीसी उपलब्ध करवाता है। हालांकि, पूरे हिमाचल में निजी स्कूलों ने अपनी बसें खरीद ली हैं, लेकिन शिमला में ऐसा नहीं है। 

 निजी स्कूलों के लिए लगाई गई बसों में विद्यार्थियों के किराये में कुछ कमी की गई।  यह कटौती बहुत कम है। सीपीएम ने आरोप लगाया कि जो पूरे प्रदेश की जनता के मुख्य मुद्दे उठाए थे, उनपर उप मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री ने चर्चा ना करने की पार्टी निंदा करती है। बसों में यात्रियों के एक छोटे से डिब्बे और चार किलो सामान का टिकट लेने व प्राइवेट रूटों को निजी हाथों देने के फैसले को वापस नहीं लिया जाता सीपीएम तब तक अपना आंदोलन जारी रखेगी और इस आंदोलन को पूरे प्रदेश में शुरू करेगी  इस आंदोलन को तब तक चलाया जाएग। सीपीएम ने सरकार से मांग की  है की सरकार किराया वृद्धि के फैसले को पूरी तरह से वापस ले ताकि जनता को राहत मिल सके।