मंडी। खदानों, बिजलीघरों और जहरीले रसायनों से भरे औद्योगिक परिसरों में काम करना अब पहले से ज्यादा सुरक्षित हो सकता है। हिमाचल प्रदेश के आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने ऐसी आधुनिक तकनीक विकसित की है, जिसकी मदद से खतरनाक स्थानों पर इंसानों की जगह रोबोट निरीक्षण और जरूरी काम कर सकेंगे। इस तकनीक में आसमान में उड़ने वाला ड्रोन जमीन पर चल रहे रोबोटिक डॉग को सुरक्षित रास्ता दिखाएगा।

इस तकनीक की खास बात यह है कि रास्ते में पत्थर, रेत, सीढ़ियां या कोई चलता हुआ व्यक्ति आने पर रोबोट खुद अपना रास्ता बदल सकेगा। इससे उन स्थानों पर कर्मचारियों की आवाजाही कम करने में मदद मिलेगी, जहां काम करना उनकी जान के लिए जोखिम भरा होता है।

ड्रोन बताएगा रोबोट को सुरक्षित रास्ता

आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इस तकनीक में ड्रोन करीब तीन मीटर की ऊंचाई पर उड़कर आसपास के वातावरण पर नजर रखता है। इसके बाद वह जमीन पर चल रहे क्वाड्रुपेड रोबोट को सुरक्षित रास्ते की जानकारी और आगे बढ़ने के निर्देश भेजता है।

खास बात यह है कि रोबोट रास्ते की बाधाओं को पहचानने के लिए अपने कैमरे जैसे बाहरी सेंसरों पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि उसे यह जानकारी ड्रोन से मिलती है। इस तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में खदानों, बिजलीघरों, तेल रिफाइनरियों, निर्माण स्थलों और अन्य जोखिमपूर्ण औद्योगिक परिसरों में किया जा सकता है।

चलते इंसान को देखकर भी बदल लेता है रास्ता

शोधकर्ताओं ने इसके लिए मोबाइल प्रोब पोटेंशियल फील्ड (एमपीपीएफ) तकनीक विकसित की है। यह तकनीक रास्ते में आने वाली बाधाओं के आकार के साथ उनकी गति और दिशा को भी ध्यान में रखती है।

परीक्षण के दौरान रोबोट ने चलते हुए इंसान से बचते हुए कम से कम 20 सेंटीमीटर की दूरी बनाए रखी। इतना ही नहीं, रोबोट को नया रास्ता तैयार करने में केवल 0.025 सेकंड का समय लगा। ड्रोन और रोबोट के बीच निर्देशों का संचार 30 हर्ट्ज की दर से होता है।

प्रयोगशाला में हुआ सफल परीक्षण

शोधकर्ताओं ने 6.73 मीटर गुणा 6.28 मीटर के प्रयोगशाला क्षेत्र में इस तकनीक का परीक्षण किया। इसमें समतल जमीन, पत्थर, रेत और सीढ़ियों जैसे अलग-अलग भूभाग शामिल किए गए। एक परीक्षण के दौरान रोबोट ने 4.5 मीटर की दूरी केवल 50 सेकंड में तय की।

हालांकि, अभी इस तकनीक का वास्तविक खदानों, सुरंगों, औद्योगिक संयंत्रों और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में परीक्षण नहीं हुआ है। ऐसे में वास्तविक परिस्थितियों में इस्तेमाल से पहले इसके और परीक्षण व तकनीकी सुधार जरूरी होंगे।

कई शोधकर्ताओं ने मिलकर तैयार की तकनीक

इस शोध में दर्शनकुमार प्रजापति, अंकित मेहरा, पुष्कर कुमार, आशीष राणा, एसके सूर्य प्रकाश और आईआईटी मंडी के सहायक प्रोफेसर डॉ. अमित शुक्ला शामिल रहे। यह शोध 19 जनवरी 2026 को आईईईई एक्सेस में प्रकाशित हुआ।

डॉ. अमित शुक्ला के अनुसार, इस तकनीक का उद्देश्य रोबोट को अलग-अलग तरह के भूभागों पर बाधाओं से बचते हुए सुरक्षित रास्ता तय करने में सक्षम बनाना है। भविष्य में इसमें और सुधार कर इसे विभिन्न जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में उपयोग के योग्य बनाने की संभावनाएं हैं।