
साहो (चंबा)। साहो, कीड़ी और लग्गा क्षेत्र के बागवान इन दिनों सेब की ग्रेडिंग और पैकिंग के कार्य में व्यस्त हैं। हालांकि, इस बार बागवानों के चेहरे पर पहले जैसी रौनक नहीं है। वजह है बीते सीजन की तरह इस बार भी कम पैदावार की आशंका।
पिछले साल ओलावृष्टि ने सेब की फसल को खासा नुकसान पहुंचाया था, वहीं इस बार सेटिंग भी कम रही है। इससे उत्पादन में गिरावट तय मानी जा रही है। बागवानों को आशंका है कि फसल कम निकलेगी और बाजार में भी अच्छा दाम नहीं मिलेगा। बागवानों ने बताया कि इस बार बी ग्रेड सेब का मूल्य बहुत कम चल रहा है। इससे लागत निकलना भी मुश्किल हो रहा है। वहीं, नई किस्मों के अच्छी गुणवत्ता वाले सेब को करीब 150 रुपये प्रति किलो तक का भाव जरूर मिल रहा है, लेकिन वह भी सीमित मात्रा में।
स्थानीय बागवानों भगत राम, संजीव कुमार, चैन सिंह, नेक राम, भिंद्रो राम आदि का कहना है कि फिलहाल साहो, कीड़ी और लग्गा क्षेत्र से तैयार सेब की खेप जल्द दिल्ली और पंजाब की मंडियों में भेजी जाएगी। उम्मीद है कि मंडियों में रेट थोड़ा सुधरे, जिससे नुकसान की भरपाई हो सके। स्थानीय बागवानों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि इस बार भी यदि दाम गिरे और उत्पादन कम हुआ तो उन्हें राहत दी जाए।
उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रमोद शाह का कहना है कि इस साल ओलावृष्टि अधिक होने से सेब की पैदावार पर असर पड़ा है। उम्मीद है कि बागवानों को सेब के अच्छे दाम मिल जाएं।
