हिमाचल प्रदेश में किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए राज्य किसान आयोग का गठन होगा। आयोग किसानों की आय बढ़ाने की रणनीति भी बनाएगा। बीज, उर्वरक, कीटनाशकों की वितरण प्रणाली की भी जांच करेगा। गुरुवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सत्र के अंतिम दिन सदन में कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग विधेयक 2026 को पटल पर रखा। इसे ध्वनिमत से पारित किया गया।

यह पहली बार है कि राज्य सरकार कृषकों की शिकायतों के समाधान के लिए किसान आयोग का गठन करने जा रही है। विधेयक के अनुसार किसान आयोग से राज्य में कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी। आयोग किसानों-बागवानों की शिकायतों का समाधान करते हुए संबंधित विभागों को समस्याओं के निवारण के निर्देश जारी करेगा। साथ ही कृषि क्षेत्र में आ रहीं चुनौतियों का विश्लेषण कर व्यावहारिक समाधान भी सुझाएगा। आयोग बीज, उर्वरक, कीटनाशकों और कृषि ऋण वितरण प्रणाली की कार्यप्रणाली की जांच करेगा और उसमें सुधार के लिए ठोस सिफारिशें देगा।

सिंचाई व्यवस्था की समीक्षा कर पानी के समुचित उपयोग के लिए नई योजनाएं तैयार करने की दिशा में भी काम करेगा। इसके अलावा कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी आयोग का विशेष जोर रहेगा। किसान आयोग सीमांत और छोटे किसानों को रियायती कर्ज व आर्थिक सहायता दिलाने में भी सहयोग करेगा। कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि वानिकी जैसे क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए सुझाव दिए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन यात्राएं आयोजित कर बेहतर मॉडलों को अपनाने की दिशा में पहल की जाएगी। आयोग कृषि जलवायु का आकलन कर कृषि संकट के कारणों का विश्लेषण करेगा और किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करेगा।

25 साल का अनुभव रखने वाला ही बनेगा किसान आयोग का अध्यक्ष
कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने सदन में बताया कि कृषि, बागवानी या पशुपालन में 25 वर्ष का अनुभव रखने वाला ही अध्यक्ष बन सकेगा, जबकि पीएचडी धारकों को प्राथमिकता मिलेगी। कार्यकाल पांच वर्ष रहेगा। अधिकतम 70 वर्ष आयु तक का अध्यक्ष बन सकेगा। विधेयक का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और नीतियों की समीक्षा करना है। विधायक कुलदीप राठौर और हंसराज ने भी आयोग गठन को लेकर सुझाव दिए। आयोग में अधिकतम तीन गैर-सरकारी सदस्य होंगे, जिनकी नियुक्ति भी समान योग्यता के आधार पर की जाएगी। आयोग में पालमपुर और नौणी विश्वविद्यालयों के कुलपति पदेन सदस्य होंगे।