
शिमला: हिमाचल प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाए गए टोल बैरियरों को लेकर विवाद अब नई दिशा में पहुंच गया है। लंबे समय से चल रही इस लड़ाई ने अब संवैधानिक रूप ले लिया है। किसान और सामाजिक संगठनों की संयुक्त संघर्ष समिति ने सीधे राष्ट्रपति भवन का दरवाजा खटखटाते हुए 80 पन्नों की विस्तृत संवैधानिक याचिका दायर की है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इस मामले में राष्ट्रपति स्तर से कोई बड़ा कदम उठाया जाएगा।याचिका में राष्ट्रपति से संविधान के अनुच्छेद 256 और 257 के तहत हिमाचल प्रदेश सरकार को निर्देश जारी कर राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थापित सभी टोल बैरियर हटाने और टोल वसूली बंद कराने की मांग की गई है।
यह याचिका संघर्ष समिति के कानूनी सलाहकार और हाईकोर्ट के अधिवक्ता उत्तांश मोंगा ने दाखिल की है, जिसे औपचारिक रूप से पंजीकृत भी कर लिया गया है। संयुक्त संघर्ष समिति में पंजाब, हिमाचल और अन्य क्षेत्रों के कई किसान व सामाजिक संगठन शामिल हैं।
याचिका में क्या कहा गया है?याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 246 और सातवीं अनुसूची की यूनियन लिस्ट के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल लगाने और वसूली का अधिकार केवल संसद और केंद्र सरकार के पास है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश विधानसभा को राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल लगाने का कोई विधायी अधिकार नहीं है।याचिका में दावा किया गया है कि हिमाचल प्रदेश टोल अधिनियम, 1975 और उसके तहत बनाई गई नीतियों के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली संविधान के प्रावधानों के विपरीत है और यह अनुच्छेद 254 के तहत भी गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े करती है।
NHAI के दस्तावेज भी बनाए आधारयाचिका में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के मंडी परियोजना निदेशक द्वारा भेजे गए पत्रों और दस्तावेजों का भी हवाला दिया गया है। दावा किया गया है कि NHAI ने कई बार राज्य सरकार से राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने टोल बैरियर हटाने का अनुरोध किया था, क्योंकि ये राष्ट्रीय राजमार्गों के संचालन, रखरखाव और विकास में बाधा बन रहे हैं।
हर साल 150 से 200 करोड़ की वसूली का दावासंघर्ष समिति ने वर्ष 2026-27 की टोल नीति पर भी सवाल उठाए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाए गए टोल बैरियरों के जरिए हर साल लगभग 150 से 200 करोड़ रुपये की वसूली कर रही है, जबकि इस वसूली की संवैधानिक वैधता ही विवादों के घेरे में है।
अब यह मामला सीधे राष्ट्रपति भवन पहुंच चुका है। ऐसे में सबकी नजर इस बात पर है कि क्या राष्ट्रपति इस याचिका पर कोई निर्देश जारी करेंगे और क्या हिमाचल के राष्ट्रीय राजमार्गों से टोल बैरियर हटेंगे? इसका जवाब आने वाले समय में ही सामने आएगा।
