साउथ कोरिया से आए 130 बौद्ध अनुयायियों ने बुधवार को मैक्लोडगंज में तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु एवं 14वें दलाई लामा के दर्शन किए। साथ ही दलाई लामा की कर्नाटक के बैलकुप्पे प्रवास की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। वह अगले वर्ष जनवरी में कर्नाटक के बैलकुप्पे जाने वाले हैं। धर्मशाला में सर्दियों का आगाज हो चुका है। तिब्बती बौद्ध धर्म गुरु को यहां ठंड की वजह से स्वास्थ्य परेशानी होती है।

17 नवंबर के बाद उनका धर्मशाला में न तो किसी तरह का प्रवास और न ही टीचिंग का शेड्यूल है। अत्यधिक सर्दियां पड़ने पर उनके प्रवास कार्यक्रम में बदलाव भी हो सकता है। तय कार्यक्रम के अनुसार मैक्लोडगंज स्थित मुख्य तिब्बती मंदिर में 17 नवंबर को दलाई लामा के लिए एक विशेष आभार कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें भारत के 7 आवासीय सीएसटी स्कूलों के पूर्व छात्रों, तिब्बती चिल्ड्रन विलेज धर्मशाला, तिब्बती होम्स फाउंडेशन मसूरी और भारत एवं नेपाल के तिब्बती डे स्कूलों के छात्रों की ओर से तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा को आभार व्यक्त किया जाएगा। इस कार्यक्रम में तिब्बती संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में दलाई लामा के योगदान के प्रति आभार प्रकट किया जाएगा।

बैलकुप्पे से लौटने के बाद 23 फरवरी को धर्मशाला में एक दीर्घायु प्रार्थना समारोह भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें दुनिया भर के पूर्व तिब्बती राजनीतिक बंदियों और ल्हासा बॉयज एसोसिएशन स्विट्जरलैंड के सदस्य दलाई लामा को उनकी लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करेंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दलाई लामा की शिक्षा और उनके योगदान के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करना है। साथ ही तिब्बती समुदाय के लोगों के बीच एकता और भाईचारे को बढ़ावा देना है।

बता दें कि धर्मगुरु दलाई लामा इस साल 3 जनवरी को धर्मशाला से कर्नाटक के बैलकुप्पे के लिए रवाना हुए थे। डेढ़ माह के प्रवास के बाद उन्होंने 21 फरवरी, 2025 को धर्मशाला में अपने निवास पर वापसी की थी। हालांकि दलाई लामा कार्यालय ने अपनी वेबसाइट पर अभी तक प्रवास का शेड्यूल जारी नहीं किया है। जबकि पूर्व में उनका प्रवास का कार्यक्रम जल्द जारी हो जाता था। जल्द ही उनका नया प्रवास कार्यक्रम जारी होने की उम्मीद है।