हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने किशाऊ बांध समझौते के दौरान ही भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में प्रदेश के लंबित बिजली एरियर के मामले में भी अपनी रणनीति तैयार कर ली थी। इस रणनीति के तहत प्रदेश सरकार ने किशाऊ समझौते को आगे बढ़ाने से पहले पंजाब और हरियाणा से BBMB के बिजली एरियर मामले में हिमाचल के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करवाने की शर्त रखी थी।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के साथ बातचीत में स्पष्ट किया था कि जब तक पंजाब और हरियाणा सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल के पक्ष में हलफनामा दाखिल नहीं करते, तब तक किशाऊ समझौते को आगे बढ़ाने पर सहमति नहीं बनेगी। इसके बाद दोनों राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल के समर्थन में हलफनामा दाखिल किया।

15 साल पुरानी बिजली की लड़ाई को मिली नई दिशा

इस घटनाक्रम से करीब 15 वर्षों से लंबित हिमाचल प्रदेश के हिस्से की 11 अरब 97 करोड़ 50 लाख यूनिट बिजली के एरियर की लड़ाई को नई दिशा मिली है। मुख्यमंत्री ने कानूनी पैरवी के साथ अंतरराज्यीय बातचीत और राजनीतिक स्तर पर भी प्रदेश का पक्ष मजबूत करने का प्रयास किया।

इस रणनीति के जरिए हिमाचल को किशाऊ बांध और BBMB, दोनों मामलों में अपने आर्थिक और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े अधिकारों की पैरवी का अवसर मिला है।

किशाऊ बांध से हर साल 1,200 से 1,500 करोड़ की आय का अनुमान

किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना से हिमाचल प्रदेश को भविष्य में सालाना करीब 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है। इस परियोजना को लेकर सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों का पूरा लाभ सुनिश्चित करना है।

बिजली के रूप में मिलेगा हिमाचल का हिस्सा

प्रदेश के महाधिवक्ता अनूप रतन ने बताया कि BBMB की परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश की बिजली हिस्सेदारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राज्य को बड़ा आर्थिक लाभ मिलने जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने नकद राशि के बजाय बिजली के रूप में हिस्सेदारी लेने का फैसला किया है। अक्तूबर से मार्च के बीच बिजली की दरें अधिक रहने के कारण प्रदेश को अपनी हिस्सेदारी की बिजली बेचने पर बेहतर कीमत मिल सकती है।

यह मामला वर्ष 1996 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। अब अदालत ने BBMB को हिमाचल प्रदेश की बिजली हिस्सेदारी तत्काल प्रभाव से जारी करने के आदेश दिए हैं।

प्रदेश के आर्थिक हितों के लिए अहम घटनाक्रम

किशाऊ बांध समझौते और BBMB बिजली एरियर मामले में हुए इन घटनाक्रमों को हिमाचल प्रदेश के आर्थिक हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर किशाऊ परियोजना से भविष्य में बड़ी आय की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर BBMB से मिलने वाली बिजली प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने में मदद कर सकती है।