
हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में कार्यरत जूनियर इंजीनियर (बागवानी) एडीओ के समान वेतन के हकदार नहीं हैं। न्यायाधीश सत्येन वैद्य की एकल पीठ ने कहा कि केवल समान शैक्षिक योग्यता और अतीत में समान वेतनमान के आधार पर अलग-अलग विभागों के पदों को समान नहीं माना जा सकता। अदालत ने आरएल शर्मा और अन्य की ओर से दायर याचिका खारिज करते हुए फैसला दिया है।
कोर्ट ने कहा कि वेतनमान तय करना और पदों का वर्गीकरण करना राज्य सरकार का विशेषाधिकार है और अदालत इसमें तभी हस्तक्षेप कर सकती है, जब कोई निर्णय मनमाना, अनुचित या पक्षपातपूर्ण हो। अदालत ने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत तभी लागू होता है, जब पदों की प्रकृति, कर्तव्य और जिम्मेदारियां समान हों। अदालत ने यह भी नोट किया कि पीडब्ल्यूडी के जूनियर इंजीनियरों के भर्ती नियमों में अब प्रतिनियुक्ति का प्रावधान हटा दिया है और उनके पास असिस्टेंट इंजीनियर व एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के रूप में पदोन्नति के रास्ते उपलब्ध हैं, जबकि कृषि व बागवानी विभागों में बागवानी सेवा और कृषि सेवा के गठन से पदों का दायरा और संरचना बदल गई है। याचिकाकर्ताओं लोक निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियर (बागवानी) ने कृषि व बागवानी विभागों के सहायक विकास अधिकारियों (एडीओ) के समान वेतनमान की मांग की थी। इसी पर हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।
