
शिमला: आग में पूरी तरह जलकर राख हुए 30 कमरों के मकान के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, शिमला ने बीमा कंपनी को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को पीड़ित को 1.25 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम, 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, 75 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना और 25 हजार रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है।
कंपनी को यह राशि 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी।मामला शिमला के टिक्कर निवासी हर्ष रांटा से जुड़ा है, जिन्होंने अपने 30 कमरों के मकान का बीमा करवाया था। 2 सितंबर 2023 की रात भीषण आग लगने से पूरा मकान और उसमें रखा सामान जलकर राख हो गया। घटना की सूचना तुरंत पुलिस और बीमा कंपनी को दी गई, लेकिन क्लेम देने के बजाय कंपनी ने विभिन्न तकनीकी कारण बताकर मामले को लगातार टालते रखा।
बीमा कंपनी ने दावा किया कि शिकायतकर्ता ने सभी जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए और मकान पैतृक संपत्ति होने के कारण अन्य वारिसों का भी अधिकार बनता है। वहीं, कंपनी के सर्वेयर ने नुकसान का आकलन करीब 80 लाख रुपये लगाया और 50 प्रतिशत डेप्रिसिएशन भी काट दिया।हालांकि, आयोग ने सर्वेयर की रिपोर्ट को विरोधाभासी मानते हुए खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी ने जानबूझकर तकनीकी आधार बनाकर क्लेम लटकाया, जबकि पीड़ित सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही जमा कर चुका था। साथ ही, अन्य वारिसों के शपथ पत्र में भी स्पष्ट था कि उन्हें क्लेम पर कोई आपत्ति नहीं है।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनियां केवल तकनीकी कारणों के आधार पर वास्तविक दावों को खारिज नहीं कर सकतीं। इसी आधार पर आयोग ने पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को पूरी क्लेम राशि और अन्य मुआवजा देने का आदेश दिया।
आखिर उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के किन तर्कों को खारिज किया और करोड़ों रुपये का क्लेम क्यों मंजूर किया? जानें पूरी खबर
