शिमला की विभिन्न अदालतों और उपभोक्ता आयोग ने बुधवार को तीन अहम मामलों में महत्वपूर्ण फैसले सुनाए। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने आग में जले मकान के मामले में बीमा कंपनी को 1.25 करोड़ रुपये का क्लेम देने का आदेश दिया। वहीं, अपीलीय प्राधिकरण ने भवन की मरम्मत के लिए किरायेदार को मकान खाली करने के निर्देश दिए, जबकि एनडीपीएस एक्ट के मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

आग में जले मकान पर 1.25 करोड़ रुपये का क्लेम

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए शिकायतकर्ता हर्ष रांटा को 1.25 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम देने का आदेश दिया। आयोग ने क्लेम राशि पर शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के भी निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 75 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 25 हजार रुपये भी अदा करने होंगे। कंपनी को 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन करना होगा।

शिकायतकर्ता हर्ष रांटा ने टिक्कर स्थित अपने 30 कमरों के मकान का बीमा कराया था। 2 सितंबर 2023 को भीषण आग में मकान और उसमें रखा सामान पूरी तरह जल गया था। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी ने तकनीकी आधारों पर क्लेम को अनावश्यक रूप से लंबित रखा और दस्तावेजों की मांग केवल भुगतान टालने के उद्देश्य से की। आयोग ने सर्वेयर की रिपोर्ट में 50 प्रतिशत डेप्रिसिएशन को भी अनुचित मानते हुए खारिज कर दिया।

मरम्मत के लिए किरायेदार को मकान खाली करने के आदेश

अपीलीय प्राधिकरण शिमला के न्यायाधीश यजुवेंद्र सिंह ने ग्लेन मैरी विला से जुड़े किरायेदारी विवाद में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि यदि मकान मालिक को भवन की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए परिसर की आवश्यकता है तो किरायेदार को भवन खाली करना होगा। साथ ही किरायेदार अनिल अरोड़ा को 1,18,776 रुपये बकाया किराया 30 दिनों के भीतर जमा करने का आदेश दिया गया।

मकान मालकिन कुसुम सूद ने याचिका में बताया था कि करीब 100 वर्ष पुराने भवन में मरम्मत, सीवरेज लाइन बदलने और अन्य आवश्यक सुधार किए जाने हैं।

एनडीपीएस मामले में आरोपी की जमानत खारिज

विशेष सत्र न्यायाधीश (फैमिली कोर्ट) शिमला विवेक शर्मा की अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामले में आरोपी दिलबर खान की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि आरोपी पहले भी जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर चुका है और कई बार सुनवाई के दौरान अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके चलते उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किए गए थे।

आरोपी ने पत्नी के प्रसव का हवाला देकर राहत मांगी थी, लेकिन अदालत ने कहा कि इस दावे के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किए गए। अदालत ने ट्रायल में देरी और बार-बार अनुपस्थिति को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।