
सोलन में स्थित चेस्टर हिल प्रोजेक्ट एक बार फिर विवादों में आ गया है। प्रदेश सरकार अब इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित जमीन को अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर रही है।जानकारी के अनुसार, चेस्टर हिल में बेनामी संपत्ति और हिमाचल की भूमि कानून की अहम धारा-118 के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं।
इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) के आदेश उपायुक्त सोलन को प्राप्त हो चुके हैं, जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।उपायुक्त अदालत में इस मामले की सुनवाई होगी, जहां सभी आरोपियों को समन भेजकर जवाब तलब किया जाएगा। नियमों के तहत धारा-118 से जुड़े मामलों में पहले आरोपियों से जवाब मांगा जाता है और साथ ही तहसील स्तर से रिपोर्ट भी ली जाती है कि उल्लंघन हुआ है या नहीं।
बताया जा रहा है कि इस मामले में पहले एसडीएम स्तर पर जांच हो चुकी है, जिसमें धारा-118 के उल्लंघन की पुष्टि की गई थी। हालांकि, उस समय जांच रोक दी गई थी, जिससे कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई। अब एक बार फिर मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच दोबारा शुरू कर दी है।अगर जांच में बेनामी संपत्ति साबित होती है, तो सरकार संबंधित जमीन को अपने कब्जे में ले सकती है।
इस बीच इस पूरे मामले को लेकर छोटा शिमला थाने में शिकायत भी दर्ज करवाई गई है, जिसमें कुछ उच्च अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।उपायुक्त मनमोहन शर्मा ने पुष्टि की है कि उन्हें जांच के आदेश मिल चुके हैं और पूरे मामले का गहराई से अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने भी साफ किया है कि राज्य सरकार बेनामी संपत्ति के मामलों में सख्ती से निपट रही है और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा
👉 कुल मिलाकर, चेस्टर हिल मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई के निर्णायक दौर में पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
