
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली मस्जिद मामले में जिला अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। जिसमें अदालत ने नगर निगम शिमला आयुक्त कोर्ट के फैसले पर स्टे लगाते हुए अगली सुनवाई के लिए 29 मई 2025 की तिथि तय की है। 29 मई की सुनवाई में शिमला नगर निगम को जवाब फाइल करना है।
निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने 3 मई 2025 को पूरी मस्जिद को गैर कानूनी बताते हुए इसकी निचली दो मंजिल भी तोड़ने के आदेश दिए थे। मस्जिद की ऊपर की तीन मंजिल को तोड़ने के आदेश बीते साल 5 अक्तूबर को दिए जा चुके हैं। निगम आयुक्त ने इसे तोड़ने के आदेश देने से पहले वक्फ बोर्ड को कई बार मस्जिद की जमीन पर मालिकाना हक के कागज देने और मस्जिद का नक्शा देने का मौका दिया, लेकिन वक्फ बोर्ड इसका कोई भी दस्तावेज पेश नहीं कर पाया।
मस्जिद विवाद एक लड़ाई की वजह से शुरू हुआ। जहां शिमला के मल्याणा इलाके में एक हिंदू व्यक्ति के साथ करीब 6 लोगों ने मारपीट की थी। जिसके बाद वो गंभीर रूप से घायल हो गया। इस मारपीट को लेकर उक्त व्यक्ति ने थाने में केस दर्ज कराया और बताया कि मारपीट के बाद सभी आरोपी मस्जिद में छिप गए। जब हिंदू संगठनों को इसका पता चला तो उन्होंने संजौली मस्जिद के खिलाफ प्रदर्शन करना शुरू कर दिया और इस मस्जिद को अवैध बताकर इसे गिराने की मांग उठाई। इसके बाद धीरे-धीरे लोगों का ये प्रदर्शन आक्रोश में बदल गया।
11 सितंबर 2024 को हिंदू संगठनों ने मस्जिद में अवैध निर्माण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर मस्जिद की ओर कूच किया था जिस पर पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिस कर्मी घायल हुए थे। वहीं, 12 सितंबर को मस्जिद कमेटी ने मस्जिद का अवैध हिस्सी तोड़ने की पेशकश की थी।
