
नौणी विवि में मधुमक्खी पालन अनुसंधान और नवाचार के साथ शहद पैकेजिंग की भी सुविधा भी होगी। इसके लिए विवि ने दो मीट्रिक टन क्षमता वाले हनी प्रोसेसिंग प्लांट और आधुनिक मधुमक्खी पालन प्रयोगशाला को स्थापित कर दिया है। इस प्लांट में मौन पालक और किसान-बागवान शहद की पैकेजिंग के साथ इसका प्रशिक्षण भी ले सकेंगे। इस प्लांट की दो मीट्रिक टन क्षमता है। यह सुविधाएं मधुमक्खी पालकों और किसान उत्पादक कंपनियों के लिए शहद के प्रसंस्करण, बोटलिंग और लैबलिंग के लिए उपलब्ध हैं।
इसके अलावा इस प्लांट में खास बात यह रहेगी कि यहां पर विभाग ने कॉम्ब फाउंडेशन मिल यूनिट भी स्थापित की है, जोकि मोम की शीट तैयार करती है। यह शीट मधुमक्खियों की कार्यक्षमता को बढ़ाएगी। इस शीट से मधुमक्खी को पहले से ही तैयार अपना छत्ता मिल जाएगा। इससे वह छत्ता बनाने में ज्यादा समय न लगाकर सीधे पराग एकत्रित करेगी। इससे शहद का अधिक उत्पादन होगा। यह मोम शीट भी नौणी विवि मौनपालकों, किसान-बागवानों को प्रदान करेगा। इस शीट को मौन पालक मधुमक्खी के लिए बनाए गए घर में रख सकता है। पहले देसी मधुमक्खी स्वतंत्र छत्तों, जंगली कॉलोनियों की तुलना में दीवार के छत्तों में सर्दियों में बेहतर तरीके से जीवित रहने के लिए जानी जाती थी, लेकिन जैसे-जैसे इन पारंपरिक मोटी दीवारों वाले घरों की संख्या कम होती जा रही है, मधुमक्खी पालन का यह तरीका विलुप्त होता जा रहा है। इसके लिए मिट्टी के छत्ते में पहले से तैयार मोम शीट को रखकर आसानी से शहद एकत्रित किया जा सकता है।
नौणी विवि का कीट विज्ञान विभाग मधुमक्खी पालन के अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विभाग ने मधुमक्खी पालन को न केवल एक व्यवहार्य उद्यमशीलता गतिविधि के रूप में बढ़ावा दिया है, बल्कि इसे परागण सेवाओं को बढ़ाने और विभिन्न फसलों, विशेष रूप से सेब, की उत्पादकता सुधारने के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में भी स्थापित किया है।
अनुसंधान निदेशक नौणी विवि डॉ. संजीव चौहान ने बताया कि मधुमक्खी पालन को लेकर कई शोध कार्य किए जा रहे हैं। इसमें किसान-बागवानों और मौनपालकों को भी शामिल किया जा रहा है। बेहतरीन गुणवत्ता शहद प्रदान करने के लिए विवि में दो मीट्रिक टन क्षमता वाला हनी प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया गया है। इसमें शहद की पैकेजिंग का कार्य किया जाएगा। इसके अलावा मौन पालकों के लिए मोम शीट भी तैयार की जाएगी। इससे मधुमक्खियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और अधिक शहर एकत्रित होगा।
