
हिमाचल सरकार ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अनुरोध किया है कि जीएसटी और इसके सरलीकरण से राज्य को होने वाले नुकसान का मुआवजा दिया जाए, ताकि, प्रदेश की ओर से चलाई जा रही जनकल्याणकारी और विकासात्मक योजनाएं प्रभावित न हों। जीएसटी काउंसिल की बैठक में प्रदेश सरकार ने पहाड़ी प्रदेशों के मंत्रियों का अलग समूह बनाने की मांग उठाई है। नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में हिमाचल सरकार की ओर से मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी शामिल हुए। उन्होंने पहाड़ी प्रदेशों के लिए मंत्रियों का अलग समूह बनाने समेत कई अन्य मांगें उठाईं। धर्माणी ने मांग उठाई कि पहाड़ी प्रदेशों के हिस्से में यहां की कठिन भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को देखकर जीएसटी का विशेष प्रावधान किया जाना चाहिए। पहाड़ी प्रदेशों की जीएसटी हिस्सा निर्धारण में खपत के अलावा क्षेत्र और उत्पाद केंद्र की भी वरीयता दी जानी चाहिए। उन्होंने जीएसटी सरलीकरण का स्वागत किया।
मामला उठाया कि पहाड़ी प्रदेशों के मंत्रियों का समूह बनाया जाए। पहाड़ी प्रदेशों के हिस्से में यहां की कठिन भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को देखते हुए विशेष प्रावधान किए जाएं। यहां जरूरी चीजों और सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने का खर्चा ज्यादा होता है और जीएसटी इकट्ठा करने का खर्चा भी ज्यादा है। पहाड़ी प्रदेशों का जीएसटी हिस्सा निर्धारण में खपत के अलावा क्षेत्र और उत्पाद केंद्र की भी वरीयता दी जानी चाहिए। उन्होंने जीएसटी सरलीकरण का स्वागत किया। कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसका लाभ आम लोगों तक पहुंचे, न कि व्यापारिक कंपनियां अपने लाभ को बढ़ाने में इसका इस्तेमाल करें, जैसा कि पूर्व में पेट्रोलियम उत्पादों बारे हो चुका है।
धर्माणी ने कहा कि पहाड़ी प्रदेशों की ओर से अपने प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने की बजाए सर्वकल्याण को ध्यान में रखते हुए उनके संरक्षण की नीति अपनाने के मद्देनजर, ईको सर्विसेज की भी गणना होनी चाहिए और पहाड़ी प्रदेशों की इसके लिए उच्च कार्बन उत्सर्जन करने वाले राज्यों की अपेक्षा जीएसटी में हिस्सेदारी ज्यादा होनी चाहिए।
