Kargil Vijay Diwas 2025: कारगिल में पाकिस्तान पर भारत की जीत को आज 26 साल हो गए हैं। न जोश कम हुआ है न ही जज्बा। कारगिल युद्ध में हिमाचल के 52 जांबाज बलिदान हुए। सेना में हिमाचल के सैकड़ों जवानों ने विपरीत परिस्थितियों में दुश्मन के छक्के छुड़ाए। कैप्टन विक्रम बतरा और सूबेदार मेजर संजय कुमार को सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। कारगिल में देश के लिए कुर्बान हुए हिमाचल के कई जांबाजों के बेटे भी अब सरहद की निगहबानी कर रहे हैं। युद्ध में पति को खो चुकीं कई वीर नारियों ने अपने बेटों को सेना में भेज दिया है। जिस गांव के सपूत ने शहादत पाई, प्रेरित होकर उसी गांव के कई युवा सेना में भर्ती हो गए। इस जज्बे को सलाम…
52 हिमाचली जवानों के नाम कुछ इस प्रकार हैं- परमवीर चक्र विजेता कैप्टन बिक्रम बत्रा, कैप्टन सौरभ कालिया, ग्रेनेडियर विजेंद्र सिंह नंदलु, बलराम दास, राइफलमैन राकेश कुमार, अशोक कुमार, लांस नायक वीर सिंह बलदोआ, लखबीर सिंह, संतोष सिंह, जगजीत सिंह, हवलदार सुरेंद्र सिंह, राइफलमैन सुनील जंग, योगिंद्र सिंह, सुरजीत सिंह और लांस नायक पदम सिंह शामिल हैं। मंडी से कैप्टन दीपक गुलेरिया, नायब सूबेदार खेम चंद राणा, हवलदार कृष्ण चंद, नायक सरवन कुमार, सिपाही टेक राम मस्ताना, सिपाही राकेश कुमार चौहान, सिपाही नरेश कुमार, सिपाही हीरा सिंह, जीडीआर पूर्ण सिंह, हवलदार गुरदास सिंह। हवलदार कश्मीर सिंह(एम-इन-डी), हवलदार राजकुमार (एम-इन-डी), सिपाही दिनेश कुमार, हवलदार स्वामी दास चंदेल, सिपाही राकेश कुमार, आरएफएन प्रवीण कुमार, सिपाही सुनील कुमार, आरएफएन दीप चंद(एम-इन-डी)। हवलदार उधम सिंह, नायक मंगल सिंह, आरएफएन विजय पाल, हवलदार राजकुमार, नायक अश्वनी कुमार, हवलदार प्यार सिंह, नायक मस्त राम। जीएनआर यशवंत सिंह, आरएफएन श्याम सिंह (वीआरसी), जीडीआर नरेश कुमार, जीडीआर अनंत राम। ऊना से कैप्टन अमोल कालिया वीर चक्र, आरएफएन मनोहर लाल। सोलन (2) सोलन से सिपाही धर्मेंद्र सिंह, आरएफएन प्रदीप कुमार, सिरमौर (2) सिरमौर से आरएफएन कुलविंद सिंह, आरएफएन कल्याण सिंह (सेना मेडल) चंबा (1) सिपाही खेम राज, कुल्लू (1) हवलदार डोला राम (सेना मेडल)
सोलन के रामशहर के पंदल के बलिदानी प्रदीप कुमार कारगिल युद्ध में देश की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर कर दिए थे। आज उनसे प्रेरणा लेकर गांव के बारह युवा देश की सरहदों के निगेहबान बने हैं। गांव के 12 युवाओं ने प्रदीप कुमार से प्रेरणा ली और देश के लिए कुछ भी करने की ठानी और सेना में भर्ती हो गए। नालागढ़ उपमंडल के रामशहर के पंदल गांव के 4 जेक राइफल के राइफलमैन प्रदीप कुमार (23) नौ जुलाई 1999 को बलिदान हो गए थे। प्रदीप कुमार उस समय 20 आरआर यूनिट में कुपवाड़ा में तैनात थे। भारत-पाक युद्ध शुरू होने से परिजनों की बेटे की शादी के लिए की तैयारियां भी धरी की धरी रह गईं। शहीद प्रदीप कुमार की बहन जमना कौशिक ने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान नौ जुलाई 1999 को उनके भाई ने देश के लिए कुर्बानी दी थी। उन्होंने कहा कि घर में भाई की शादी की तैयारियां चल रही थीं। भाई ताबूत में लिपटकर वापस आया। जमना ने बताया कि उनके जाने के बाद गांव के युवाओं ने उनसे प्रेरणा ली और आज गांव के 12 युवा देश सेवा के लिए सरहदों पर तैनात हैं। जब भी वह छुट्टियों में घर आते हैं तो उनके भाई की शहादत को याद करते हैं। जमना ने बताया कि उनके परिवार में भी देश सेवा का जज्बा पहले से ही है। उनके पिता जगन्नाथ भी सेना से सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और 1961 और 1965 की लड़ाई लड़ चुके हैं।
चौपाल उपमंडल के कलारा गांव के सपूत राइफलमैन श्याम सिंह भीखटा ने मात्र 25 वर्ष की आयु में 1999 में ऑपरेशन विजय के दौरान बलिदान दिया था। कलारा में 26 जनवरी 1974 को नंद राम और देवकू देवी के घर जन्मे श्याम सिंह को बचपन से ही सेना में भर्ती होने का जुनून था। 29 दिसंबर 1994 को वह 13 जैक राइफल में भर्ती हो गए। 1999 में पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल से खदेड़ने के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय चलाया। ऑपरेशन विजय में चार्ली कंपनी की असॉल्ट टीम के सदस्य बने श्याम सिंह कंपनी के साथ परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा के नेतृत्व में पांच जुलाई को कारगिल में टाइगर हिल की मशको घाटी के प्वाइंट 4875 के लिए निकले थे। बेहद खराब मौसम और विपरीत परिस्थितियों के बीच उनकी टीम आगे बढ़ रही थी। प्वांइट 4875 में बड़ी संख्या में दुश्मन छिपे थे, जिसका उन को अंदाजा नहीं था। इस दौरान घात लगाकर बैठे दुश्मनों ने भारतीय जवानों पर हमला कर दिया। अदम्य साहस का परिचय देते हुए श्याम सिंह ने एक घुसपैठिए को वहीं ढेर कर दिया, जबकि एक को घायल कर दिया। श्याम सिंह के साहस से प्रेरणा ले कर उनकी टुकड़ी के अन्य जवान भी दोगुने जोश के साथ लक्ष्य की ओर बढ़ते गए। दुश्मन को खदेड़ कर उनकी टीम ने प्वाइंट विक्रम बत्रा के नेतृत्व में 4875 पर कब्जा कर लिया। चार्ली कंपनी जीत का जश्न मना भी नहीं सकी थी कि श्याम सिंह दुश्मन की एक स्नाइपर राइफल से चली गोली से बलिदान हो गए। शहीद श्याम सिंह को मरणोपरांत विशेष सेना मेडल वीर चक्र प्रदान किया गया।

