मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा नैतिकता की बात न करे। सोलन और चंबा में क्या हो रहा है, वह सबके सामने हैं। भाजपा के पास अब कुछ कहने को नहीं है। नैतिकता की बात उन्हें करनी चाहिए, जिनमें नैतिकता बची हो।  रिज मैदान शिमला में मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में ज्यादा स्टाफ दिया जाएगा, जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। वहीं रामपुर में कहा कि आईजीएमसी शिमला और चमियाना में छह माह में एम्स स्तर के उपकरण होंगे। शिमला में मीडिया से बातचीत में सीएम ने कहा कि भाजपा की ओर से सरकार के 3 साल के कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाने का हक नहीं है। ये सरकारी कार्यक्रम है, जिसमें सरकार अपने काम जनता के बीच रखेगी। भाजपा का आरोप है कि नेरचौक से मेडिकल कॉलेज के 41 प्रोफेसर हटा दिए गए हैं, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।

हर एक मेडिकल कॉलेज का अलग कैडर बन रहा है। आईजीएमसी का भी अलग कैडर बन रहा है। नेरचौक के 28 डॉक्टरों को मंडी की उन डिस्पेंसरियों में भेजा, जहां डॉक्टर नहीं थे। भाजपा ने संस्थान तो खोल दिए, लेकिन एमआरआई जैसी मशीनें ठेके पर दे दीं। अब ऐसा नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार करीब 75 हजार करोड़ रुपये का कर्ज छोड़कर गई है। अब इसी कर्ज को चुकाने के लिए वर्तमान सरकार को और कर्ज लेना पड़ रहा है। पहले भ्रष्टाचार के चोर दरवाजों से धन लुटा दिया जाता था, अब उसको बचाने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल देश का पहला ऐसा राज्य बना जहां इन बच्चों के लिए मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना बनी। अब इन बच्चों का पैदा होने से लेकर 27 साल तक सरकार ख्याल रखेगी। इन्हें चिल्ड्रन ऑफ स्टेट का दर्जा दिया गया है। सरकार इन बच्चों का माता-पिता की तरह ध्यान रखेगी। इनके लिए अभी तक कोई खेल कार्यक्रम नहीं हुआ था। अब इसका शुभारंभ किया है। यह तीन दिन चलेगा।

चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय लवी मेले के समापन समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कहा कि शिपकी ला के रास्ते व्यापार फिर से शुरू करने का प्रयास प्रदेश सरकार कर रही है। इस बारे में केंद्र सरकार से पत्राचार भी किया जा रहा है। शिपकी ला के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने पर भी बातचीत की जा रही है। कहा कि सरकार ने पहली बार बॉर्डर टूरिज्म के तहत शिपकी ला तक के रास्ते को खुलवाया। 70,000 से अधिक पर्यटक शिपकी ला दर्रे तक भ्रमण कर चुके हैं। सरकार ने केंद्र के समक्ष आपदा के कारण अपनी जमीन गंवाने वाले परिवारों के वन भूमि पर पुनर्वास का मामला उठाया है, क्योंकि इससे संबंधित वन भूमि अधिनियम कानून केंद्र सरकार के अधीन आता है। उन्होंने कहा कि केंद्र अगल अनुमति दे, तो हम हर भूमिहीन परिवार को एक बीघा जमीन देने के लिए तैयार हैं। कानून हमारे अधिकार क्षेत्र में होता, तो वह इसे एक मिनट में बदल देता।