
हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपनी पर्यावरण, पर्यटन नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इस बदलाव के तहत निजी पार्टियों को परियोजनाओं के आवंटन की अवधि बढ़ा दी गई है। अब यह अवधि 10 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी गई है, इसमें पांच साल का विस्तार भी शामिल है। यह प्रावधान पर्यटन और वन निगमों के लिए भी रहेगा। यह संशोधन अतिरिक्त मुख्य सचिव वन ने अधिसूचना कर ईको टूरिज्म नीति में संशोधन कर किया है। पहले निजी पार्टियों की ओर से बड़े निवेश वाली परियोजनाओं के लिए आवंटन अवधि 10 साल थी, जिसे पांच साल के लिए बढ़ाया जा सकता था।
ये होंगे नए प्रावधान
पर्यटन और वन निगमों के लिए भी यही अवधि लागू थी। नए प्रावधानों के अनुसार, अब यह अवधि सीधे 15 साल होगी, जिसे संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर पांच साल के लिए और बढ़ाया जा सकेगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) कमलेश कुमार पंत की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार पांच साल का विस्तार कुछ विशिष्ट शर्तों के अधीन होगा। इसमें ऑपरेटरों का संतोषजनक प्रदर्शन शामिल हाेगा। उन्हें पर्यावरण, वन और वन्यजीव कानूनों का पूरी तरह से पालन करना होगा। राजस्व-साझाकरण दायित्वों को भी पूरा करना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, एचपीईसीओएसओसी की कार्यकारी समिति की मंजूरी भी आवश्यक होगी।
इस नीतिगत बदलाव का मुख्य उद्देश्य राज्य में पर्यावरण-पर्यटन क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करना है। लंबी आवंटन अवधि निवेशकों को अधिक स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करेगी। इससे उन्हें अपनी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश करने का प्रोत्साहन मिलेगा। यह कदम हिमाचल प्रदेश को एक प्रमुख पर्यावरण-पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।
