
हिमाचल प्रदेश में बजट तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर विधानसभा की प्राक्कलन समिति ने गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति के अनुसार विभागों की ओर से वास्तविक जरूरतों का आकलन करने के बजाय पिछले वर्षों के खर्च को आधार बनाकर बजट अनुमान तैयार किए जाते रहे।
समिति का कहना है कि इस तरीके से बजट तैयार होने के कारण बजट प्रावधान और वास्तविक खर्च के बीच अंतर बना रहा। यानी जिन मदों में जितनी राशि की जरूरत थी, उसका आकलन जमीनी आवश्यकताओं के आधार पर करने के बजाय पुराने आंकड़ों के सहारे किया जाता रहा।
पुराने खर्च के आधार पर बनते रहे अनुमान
प्राक्कलन समिति के अनुसार विभागों को बजट तैयार करते समय मौजूदा जरूरतों, योजनाओं की वास्तविक स्थिति और भविष्य की आवश्यकताओं का आकलन करना चाहिए। लेकिन इसके बजाय पिछले वर्षों में कितना खर्च हुआ, उसी को आधार बनाकर आगे का बजट अनुमान तैयार करने की प्रवृत्ति रही।
इससे कई मामलों में बजट में किए गए प्रावधान और वास्तविक व्यय में अंतर देखने को मिला। समिति ने इस प्रक्रिया में सुधार की जरूरत पर जोर दिया है।
जमीनी जरूरतों पर ध्यान देने की जरूरत
समिति के सवालों के बाद अब बजट निर्माण की प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सवाल यह है कि जब बजट में प्रावधान वास्तविक जरूरतों के बजाय पुराने खर्च के आंकड़ों पर आधारित होंगे, तो क्या योजनाओं का लाभ लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं के मुताबिक पहुंच पाएगा?
प्राक्कलन समिति ने संकेत दिया है कि बजट तैयार करते समय जमीनी जरूरतों और वास्तविक मांग का आकलन अधिक प्रभावी तरीके से किया जाना जरूरी है, ताकि सरकारी धन का बेहतर इस्तेमाल हो सके और बजट प्रावधान तथा वास्तविक खर्च के बीच का अंतर कम किया जा सके।
