
हिमाचल प्रदेश सरकार ने पूर्व जयराम सरकार के समय दिए गए उच्च वेतनमान के निर्णय को वापस लेने के मामले में यू-टर्न लिया है। सरकार ने इस संबंध में 6 सितंबर को जारी अधिसूचना को प्रशासनिक आधार पर अगले आदेश तक फिलहाल स्थगित रखने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री के कर्मचारियों को आश्वासन के बाद सोमवार शाम को वित्त विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई। बता दें, 2022 में जारी अधिसूचना के अनुसार 89 श्रेणियों के विभिन्न कर्मचारियों को दो वर्ष का नियमित कार्यकाल पूर्ण करने पर उच्च वेतनमान दिया गया था। लेकिन माैजदा सरकार ने इसे वापस ले लिया था। इसके विरोध में सोमवार सुबह अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ, सचिवालय कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारी मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मिलने पीटरहाॅफ पहुंचे। इसमें कर्मचारी कर्मचारी नेता प्रदीप ठाकुर व और त्रिलोक ठाकुर सहित अन्य शामिल रहे।
इस दाैरान सीएम ने कर्मचारी नेताओं को आश्वासन दिया है कि इस पर विचार किया जाएगा। कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री को इससे होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया। उन्होंने चर्चा के बाद यह आश्वासन दिया है कि कर्मचारियों के हितों के मद्देनजर पूर्व में जारी अधिसूचना को वापस लिया जाएगा। उच्च वेतनमान वाली अधिसूचना को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके तहत किसी भी कर्मचारी के वेतन में कटौती नहीं होगी। यह फैसला नई भर्तियों पर लागू होगा। भविष्य में नए भर्ती कर्मियों की अतिरिक्त इंक्रीमेंट रोकी जाएगी। कहा कि यह फैसला भविष्य में लागू होगा, पहले से तैनात कर्मियों पर नहीं। अधिसूचना में संशोधन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग को इस बारे में आदेश जारी कर दिए हैं। सीएम के आश्वासन के बाद शाम को अधिसूचना जारी की गई। इससे पहले कर्मचारी नेता प्रदीप ठाकुर ने कहा कि हर कर्मचारी को इससे 13 से 14 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। मुख्यमंत्री सुक्खू कर्मचारी हितैषी हैं और उन्होंने सत्ता में आते ही ओपीएस लागू की थी। त्रिलोक ठाकुर ने कहा कि इस फैसले से 89 श्रेणियों के कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने जल्द जेसीसी बैठक बुलाने की भी मांग उठाई।
