
विभिन्न विभागों और बोर्डों-निगमों को इस्तेमाल नहीं की गई लीज पर ली गई जमीन राज्य सरकार को वापस करनी होगी। हिमाचल प्रदेश सरकार ने जिला उपायुक्तों और सभी विभागों से लीज की जमीन का रिकॉर्ड मांगा है। इसको लेकर बाकायदा उपायुक्तों को पत्र जारी किए जा रहे हैं। कितनी जमीन का इस्तेमाल किया गया है और कितनी जमीन खाली पड़ी है। इसका पूरा ब्योरा सरकार ने मांगा है।
हाल ही में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट सब कमेटी ने यह फैसला लिया है। विभिन्न विभागों और निगमों-बोर्डों ने सरकार से करोड़ों रुपये की जमीन भवन निर्माण, खेल मैदान और अन्य गतिविधियों के लिए लीज पर ले रखी है, लेकिन वर्षों से जमीन का इस्तेमाल नहीं किया गया है। न वहां भवन निर्माण हुए, न खेल मैदान बने और न अन्य गतिविधियों के लिए जमीन का उपयोग किया गया। उद्योग विभाग, कृषि बागवानी, शिक्षा, बिजली बोर्ड, जल शक्ति, लोक निर्माण विभाग व निजी कंपनियों ने प्रोजेक्ट लगाने के लिए सरकार से 20 -20 वर्षों से जमीन लीज पर ले रखी है, लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
सरकार का मानना है कि जिस उद्देश्य से जमीन ले रखी है, वे प्रोजेक्ट धरातल पर उतरने चाहिएं, लेकिन विभागों और निगमों-बोर्डों की लापरवाही के चलते जमीन इस्तेमाल नहीं हुई। ऐसे में सरकार ने जमीन वापस लेने का फैसला लिया है। इन जमीनों को किसी दूसरे विकास कार्यों के लिए दिया जाएगा। सरकार की ओर से सबसे ज्यादा जमीन उद्योग विभाग को दी गई है। कई जगह उद्योग स्थापित किए गए हैं, जबकि कई जगह जमीन खाली पड़ी है। इसे इस्तेमाल में नहीं लाया जा रहा है। आसपास के लोग जमीन पर कब्जा करके बैठे हैं।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि लीज पर दी गई जमीन का रिकाॅर्ड मांगा गया है। इसको लेकर विभागों और उपायुक्तों को पत्र भेजे जा रहे हैं। करोड़ों की जमीन बेकार पड़ी है। इस जमीन को इस्तेमाल में लाया जाएगा। कैबिनेट सब कमेटी की अगली बैठक में लीज पर दी गई जमीन का रिकाॅर्ड लाने के निर्देश दिए गए हैं।
