शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट (OTA) भर्ती मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी पद के लिए शैक्षणिक योग्यता तय करना नियोक्ता का विशेषाधिकार है। अदालत ने कहा कि जब भर्ती नियमों और विज्ञापन में योग्यता की शर्त स्पष्ट हो, तो न्यायिक समीक्षा के नाम पर उसमें ढील नहीं दी जा सकती।
न्यायाधीश रंजन शर्मा की अदालत ने नरेंद्र कुमार की ओर से दायर याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। मामले में याचिकाकर्ताओं ने ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट के पद के लिए 10+2 में जीव विज्ञान की अनिवार्यता को चुनौती दी थी।
10+2 में बायोलॉजी की शर्त क्यों रखी गई?
हाईकोर्ट ने कहा कि ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट के काम में मानव शरीर और जैविक स्थितियों की बुनियादी समझ जरूरी है। ऐसे में 10+2 में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी की शर्त को पद की प्रकृति और जिम्मेदारियों के अनुरूप माना गया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम या अतिरिक्त शैक्षणिक योग्यता तय करने का अधिकार संबंधित नियोक्ता का है। भर्ती नियमों में निर्धारित योग्यता के विपरीत किसी अयोग्य उम्मीदवार को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करना समानता के संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं होगा।
113 पदों के लिए निकली थी भर्ती
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग ने 16 सितंबर 2017 को जारी विज्ञापन के माध्यम से ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट के 113 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। भर्ती नियमों के अनुसार उम्मीदवार के लिए 50 फीसदी अंकों के साथ 10+2 साइंस में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषयों के साथ पास होना अनिवार्य था।
इसके साथ ही मान्यता प्राप्त संस्थान से ओटीए ट्रेनिंग कोर्स या समकक्ष डिग्री की शर्त भी रखी गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने भर्ती के लिए आवेदन किया और उन्हें मूल्यांकन के लिए बुलाया गया, लेकिन बाद में आयोग ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया। इसका कारण यह था कि उनके पास 10+2 में निर्धारित साइंस विषय, विशेष रूप से जीव विज्ञान, नहीं था।
याचिकाकर्ताओं ने इसी शर्त को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए इसे मनमाना और अवैध बताया था। हाईकोर्ट ने दलीलों को खारिज करते हुए भर्ती विज्ञापन में निर्धारित योग्यता की शर्त को बरकरार रखा।