
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में विचारणीय कृषि विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति की नियुक्ति पर प्रतिवादी राजभवन की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवॉल दुआ की अदालत ने इस मामले को सुनवाई के लिए 12 नवंबर का दिन रखा है। याचिका में सवाल उठाए गए हैं कि वरिष्ठता को दरकिनार कर कार्यवाहक कुलपति की नियुक्त किया गया है। विश्वविद्यालय को ओर से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अधिनियम कुलाधिपति को वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों में से किसी को भी नियुक्त करने की छूट देता है। प्रतिवादी वरिष्ठता सूची में दूसरे नंबर पर हैं, इसलिए कुलाधिपति ने कोई अवैधता नहीं की है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने हाल ही में अधिनियम की धारा 24 में संशोधन करते हुए एक विधेयक पारित किया है, जिसके तहत अब कुलपति की नियुक्ति कुलाधिपति को राज्य सरकार की सहायता और सलाह से निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता के रेफरेंस को फिर से स्वीकार करे और कानून के अनुसार पार्टियों के बीच सुलह कराने का प्रयास करे। याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी से 2,55,96,949 और ब्याज की वसूली के लिए काउंसिल में एक रेफरेंस दायर किया था। काउंसिल ने 16 दिसंबर 2024 के अपने आदेश में याचिकाकर्ता के रेफरेंस को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह समय बाधित है। काउंसिल ने तर्क दिया कि यह एक दीवानी अदालत में दायर किए गए मुकदमे के समान है और सीमा अधिनियम, 1963 के अनुसार तीन साल की सीमा अवधि लागू होती है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास 2006 में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है, इसमें कहा गया है कि माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल एक रेफरेंस को केवल सीमा अवधि के आधार पर खारिज नहीं कर सकती है। अदालत ने कहा कि परिषद की ओर से सीमा अवधि के आधार पर रेफरेंस खारिज करना असांविधानिक है। न्यायालय ने इस आधार पर काउंसिल के 16 दिसंबर 2024 के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने परिषद को करनी होगी। हालांकि, राज्यपाल ने अभी तक इस विधेयक को अपनी सहमति नहीं दी है, जिसके कारण विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपतियों की नियुक्ति में देरी हो रही है।
