
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 18 करोड़ रुपये से अधिक की क्रिप्टो करंसी धोखाधड़ी में मुख्य आरोपियों में से एक अभिषेक शर्मा को जमानत देने से इन्कार कर दिया है। न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल लंबी कैद की अवधि जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं है, खासकर जब अपराध की प्रकृति गंभीर हो और जो आर्थिक अपराध से जुड़ा हो।
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के अनुसार इस धोखाधड़ी के शिकार हजारों निवेशक हैं और अनुमानित नुकसान 500 करोड़ रुपये है। याचिकाकर्ता मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा का करीबी सहयोगी था जो फिलहाल फरार है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते अदालत ने अभिषेक शर्मा को जमानत देने से इन्कार कर दिया। आरोपी अभिषेक शर्मा के खिलाफ 24 सितंबर 2023 को पालमपुर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी।
शिकायतकर्ता अरुण सिंह गुलरिया ने आरोप लगाया था कि अभिषेक शर्मा, सुभाष शर्मा, मिलन गर्ग और अन्य ने फर्जी वेबसाइट के माध्यम से लोगों को क्रिप्टो करंसी में निवेश करने के लिए लुभाया। इन आरोपियों ने निवेशकों के पैसे को दोगुना करने का वादा किया था, जिससे 18 करोड़ रुपये से अधिक धोखाधड़ी हुई। आरोपी की ओर से हाईकोर्ट से जमानत याचिका दायर की गई थी। जमानत याचिका में बताया गया था कि आरोपी लगभग 1 साल 9 महीने से हिरासत में है और ट्रायल पूरा होने में देरी हो रही है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से दायर की गई यह तीसरी याचिका है और पिछली याचिका और इस याचिका में परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं है।
