
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने छोटे व अधिकतर अस्थायी कर्मियों वाले कार्यालयों को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने को तर्कहीन ठहराया है। कोर्ट ने टिप्पणी की है यदि सरकार वास्तव में शिमला को भीड़भाड़ मुक्त करने की इच्छा रखती है, तो शिमला शहर से बड़ी संख्या में कर्मचारियों वाले कार्यालयों को शिमला से बाहर स्थानांतरित करने के साहस दिखाई। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई के पश्चात यह टिप्पणी की।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि जिन कार्यालयों को स्थानांतरित किया जा रहा है वहां के कर्मचारियों की संख्या भी बहुत कम है और इसलिए राज्य सरकार को छोटे संस्थानों को निशाना बनाने के बजाय नियमित कर्मचारियों वाले अपने बड़े ऑफिसों को शिफ्ट करने की सलाह दी जा सकती है।
डिवेलममेंट ब्लॉक मुख्यालय नगरोटा सूरियां से जवाली शिफ्ट न करने की मांग खारिज
शिमला। हाईकोर्ट ने डिवेलपमेंट ब्लॉक का मुख्यालय नगरोटा सूरियां से जवाली में स्थानांतरित न करने की मांग को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने मुख्यालय के स्थानांतरण की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज करते हुए उस मांग को भी रद्द कर दिया जिसके तहत डिवेलपमेंट ब्लॉक नग्रोटा सूरियां की दस पंचायतों को डिवेलपमेंट ब्लॉक देहरा को स्थानांतरित करने के निर्णय को खारिज करने की प्रार्थना की गई थी।
