हिमाचल प्रदेश की राजनीति में जिला परिषद लंबे समय से बड़े नेताओं की राजनीतिक पाठशाला मानी जाती रही है। जिला परिषद की राजनीति से निकले कई चेहरे आज विधानसभा पहुंच चुके हैं। यही कारण है कि इस बार भी जिला परिषद चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों और बड़े नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी है। कई मंत्री, विधायक और वरिष्ठ नेता अब अपनी राजनीतिक विरासत बेटा, बेटी और बहुओं को सौंपने की तैयारी में हैं।

 प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत जिला परिषद से की थी। इसके अलावा विधायक हंसराज, पवन काजल, रीना कश्यप और सुरेंद्र शौरी जैसे कई नेता भी पंचायतीराज संस्थाओं से आगे बढ़कर विधानसभा तक पहुंचे हैं। यही वजह है कि जिला परिषद चुनावों को विधानसभा की राजनीति का मजबूत आधार माना जाता है। इस बार के चुनावों में कई मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के बेटे, बेटियां और रिश्तेदार मैदान में हैं। कुछ नेता अपनी बहुओं को चुनावी राजनीति में उतार रहे हैं तो कहीं बेटियां जिला परिषद सदस्य बनने के लिए जनता के बीच पहुंच रही हैं। 

पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह, कांग्रेस वरिष्ठ नेता कौल सिंह, भाजपा नेता महेश्वर सिंह, कांग्रेस पूर्व विधायक सोहन लाल, पूर्व मंत्री सुखराम चौधरी सहित कई नेताओं के बेटा, बेटी और रिश्तेदार चुनाव मैदान में हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के वरिष्ठ नेता अपने समर्थित प्रत्याशियों को जिताने के लिए लगातार गांव-गांव जाकर प्रचार कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी मुकाबले काफी रोचक हो गए हैं। कई सीटों पर सीधा मुकाबला राजनीतिक परिवारों के उम्मीदवारों के बीच देखने को मिल रहा है।

भाजपा समर्थित प्रत्याशियों के पक्ष में पूर्व मंत्री और विधायक मोर्चा संभाले हुए हैं, जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी अपने समर्थकों को जीत दिलाने के लिए लगातार जनसभाएं कर रहे हैं। जिला परिषद चुनाव केवल स्थानीय विकास तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यह आने वाले विधानसभा चुनावों की जमीन तैयार करने का भी माध्यम बन चुके हैं। जिला परिषद सदस्य बनने वाले कई युवा नेता भविष्य में विधानसभा और लोकसभा की राजनीति में भी कदम रख सकते हैं। प्रदेश में इस बार के पंचायतीराज चुनावों में पारिवारिक राजनीतिक विरासत और नए नेतृत्व के बीच दिलचस्प संतुलन देखने को मिल रहा है। 

पुलिस के पहरे में पहुंचेंगे बैलेट बाॅक्स

 हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था कर दी है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान बैलेट बॉक्स को पुलिस के कड़े पहरे में मतदान केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने संयुक्त रूप से विस्तृत सुरक्षा योजना तैयार की है। पंचायत समिति (बीडीसी) और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव में इस्तेमाल होने वाली मतपेटियों को मतदान के बाद स्ट्रांग रूम में रखा जाएगा। इन स्ट्रांग रूम की सुरक्षा के लिए पुलिस के जवान चौबीस घंटे तैनात रहेंगे। आयोग ने कहा है कि मतपेटियों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं जाएगी। प्रत्याशियों की उपस्थिति में ही 31 मई को इन्हें खोला जाएगा।

मतदाताओं को पहचान पर्चियां सादे कागज पर

प्रदेश के संवेदनशील और अति की संवेदनशील मतदान केंद्रों की विशेष निगरानी की जाएगी। ऐसे मतदान केंद्रों पर चार से पांच पुलिस कर्मचारियों की तैनाती रहेगी। अतिरिक्त पुलिस बल भी रिजर्व रखा गया है। निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों को मतदान प्रक्रिया के दौरान लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।  राज्य निर्वाचन आयोग ने आदेश दिए है कि मतदाताओं को पहचान पर्चियां सादे (सफेद) कागज पर दी जाएंगी। इन पर्चियों ने किसी भी प्रत्याशियों का नाम नहीं लिखा जाएगा न ही चुनाव चिह्न होगा। पर्ची पर सिर्फ मतदाता का नाम होगा। व्यूरो