बजट घोषणाओं की हकीकत: तीन साल बाद भी कई योजनाएं अधूरी, 21 मार्च को सुक्खू सरकार का चौथा बजट

हिमाचल प्रदेश की मौजूदा कांग्रेस सरकार 21 मार्च को अपना चौथा बजट पेश करेगी, लेकिन तीन साल पहले पहले बजट भाषण में की गईं कई घोषणाएं अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में घोषित कई योजनाएं फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी हैं। कुछ घोषणाओं पर तो काम ही शुरू नहीं हो सका है। साल 2024-25 और 2025-2026 के बजट की भी कई घोषणाओं पर अभी तक काम नहीं हुआ है। विशेषज्ञ इसे संसाधनों की कमी के साथ वित्तीय प्रबंधन की कमजोरी से जोड़ रहे हैं, जबकि प्रदेश सरकार का दावा है कि बजट की सभी घोषणाओं पर चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।

सुक्खू सरकार के पहले बजट (वर्ष 2023-24) में छह ग्रीन काॅरिडोर बनाने और 31 मार्च, 2026 तक हिमाचल को ग्रीन एनर्जी स्टेट के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई थी। अभी तक न ये काॅरिडोर बने और न ही हिमाचल ग्रीन एनर्जी स्टेट। इसी बजट में नई बागवानी नीति लाने और 20 हजार मेधावी छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी पर 25 हजार रुपये उपदान देने की घोषणा की गई थी। न बागवानी नीति बनी और न ही स्कूटी पर उपदान की योजना सिरे चढ़ी।

हिमाचल: बजट घोषणाओं का सच—तीन साल बाद भी कई योजनाएं धरातल से दूर, 21 मार्च को आएगा चौथा बजट

हिमाचल प्रदेश में मौजूदा कांग्रेस सरकार के पिछले तीन बजट भाषणों में की गई कई बड़ी घोषणाएं अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। 21 मार्च को मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu अपना चौथा बजट पेश करने जा रहे हैं, लेकिन इससे पहले पिछले वर्षों की अधूरी घोषणाओं पर सवाल उठने लगे हैं। कई योजनाओं पर या तो काम शुरू नहीं हुआ या वे अब भी फाइलों में अटकी हुई हैं।

पहले बजट में कांगड़ा में अंतरराष्ट्रीय गोल्फ कोर्स बनाने की घोषणा की गई थी, लेकिन तीन साल बाद भी इस दिशा में ठोस प्रगति नहीं हो सकी। इसी तरह चंबा, हमीरपुर और नाहन के मेडिकल कॉलेजों में पैट स्कैन मशीनें लगाने का वादा भी अभी तक पूरा नहीं हो पाया। वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 के बजट भाषणों में की गई कई अन्य घोषणाएं भी अमल का इंतजार कर रही हैं।

हालांकि सरकार ने कुछ योजनाओं को लागू भी किया है। महिलाओं को 1500 रुपये मासिक सहायता देने की घोषणा को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके अलावा 600 करोड़ रुपये की युवा स्टार्टअप योजना, सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग एक्ट में बेटियों को परिवार में अलग इकाई मानने का प्रावधान, संजौली से हेलीटैक्सी सेवा, मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी, खिलाड़ियों की डाइट मनी बढ़ाना और नशा मुक्त हिमाचल अभियान जैसी पहलें शुरू की गई हैं। शिमला के जाठिया देवी में नया शहर बसाने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई है। शिलारू और मेहंदली में नई मंडियों की स्थापना तथा सेब सीजन 2024 से यूनिवर्सल कार्टन के उपयोग की घोषणा को भी लागू किया गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना को भी लागू किया गया।

इसके बावजूद कई महत्वपूर्ण घोषणाएं अब तक अधूरी हैं। वर्ष 2023-24 के बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए छह ग्रीन कॉरिडोर बनाने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक एक भी कॉरिडोर नहीं बन पाया। नई बागवानी नीति बनाने का एलान भी तीन साल बाद तक अधूरा है। मेधावी छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदने पर 25 हजार रुपये की सब्सिडी देने की योजना भी लागू नहीं हो सकी।

वर्ष 2024-25 के बजट में हिमाचल की पहली स्क्रब टायफस रिसर्च यूनिट स्थापित करने, स्कूलों के विद्यार्थियों को स्टील की पानी की बोतलें देने और टांडा मेडिकल कॉलेज तथा केएनएच शिमला में लेक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर खोलने की घोषणाएं भी अब तक शुरू नहीं हो पाई हैं। इसी तरह मंडी में प्रस्तावित सोलर पार्क और कांगड़ा तथा सोलन में सौर ऊर्जा संयंत्रों की योजनाएं भी आगे नहीं बढ़ सकीं।

वर्ष 2025-26 के बजट की कई घोषणाएं भी अभी फाइलों में ही बंद हैं। सोलन और जयसिंहपुर में इंडोर स्टेडियम का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। किसानों के लिए एग्रीकल्चर लोन इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम लागू नहीं हो सकी। धर्मशाला के तपोवन में अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, मंडी में आइस स्केटिंग रिंक और ड्रोन स्टेशन तथा कुल्लू के मौहल में दुग्ध संयंत्र लगाने की योजनाएं भी लंबित हैं।

पूर्व आईएएस अधिकारी J. C. Sharma का कहना है कि सरकार को संसाधनों के सृजन पर ध्यान देना चाहिए और फिजूलखर्ची रोकनी चाहिए। वहीं पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव Tarun Shridhar का मानना है कि कई बार बजट घोषणाएं उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप नहीं होतीं, इसलिए वे समय पर पूरी नहीं हो पातीं।

अर्थशास्त्री Dr. Ramlal Sharma का कहना है कि बजट घोषणाओं का समय पर पूरा न होना सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है और इससे जनता का भरोसा प्रभावित होता है।

विपक्ष के नेता Jairam Thakur ने भी आरोप लगाया है कि पिछले तीन वर्षों की कई घोषणाएं अब तक जमीन पर नहीं उतरीं और इन मुद्दों को विधानसभा में उठाया जाएगा। वहीं तकनीकी शिक्षा मंत्री Rajesh Dharmani का कहना है कि सरकार बजट घोषणाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा कर रही है और जमीन से जुड़ी कुछ बाधाओं के कारण समय लग रहा है।

ऐसे में 21 मार्च को पेश होने वाले चौथे बजट से पहले यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार पहले की अधूरी घोषणाओं को पूरा करने पर जोर देगी या फिर नई योजनाओं की लंबी सूची सामने आएगी।