वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनु सिंघवी की ओर से राज्यसभा चुनाव के नतीजे को चुनौती देने वाली याचिका पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए नई समयसारिणी निर्धारित की है। वीरवार को हुई सुनवाई के बाद 26 अगस्त तक दस्तावेजों की स्वीकृति और अस्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। साक्ष्य दर्ज करने और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के 15 दिनों के भीतर प्रतिवादी हर्ष महाजन को अपने गवाहों की सूची और संबंधित शुल्क जमा करना होगा। इसके बाद मामले को 12 सितंबर को अतिरिक्त रजिस्ट्रार न्यायिक के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।

न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की अदालत ने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1995 की धारा 86(7) को ध्यान में रखते हुए सुनवाई को यथाशीघ्र पूरा किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों को अनावश्यक स्थगन से बचना चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव परिणाम घोषित करने में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के सही प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है। राज्यसभा चुनाव में वोट टाई होने के बावजूद रिटर्निंग ऑफिसर ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 1951 का उपयोग करने के बजाय चुनाव संचालन नियम 1961 के नियम 75(4) और 81(3) को लागू किया। इस प्रक्रिया के तहत पर्ची के माध्यम से विजेता का फैसला किया गया, जबकि सिंघवी का तर्क है कि कानून के अनुसार उन्हें ही विजय घोषित किया जाना चाहिए था।