
विभागीय जांचों में हो रही देरी पर सरकार ने सख्ती बरतते हुए इन्हें 90 दिनों में पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी कॉलेज प्रिंसिपलों और शिक्षा उपनिदेशकों को इस बाबत पत्र जारी किए। कहा, दो-तीन वर्षों से अनसुलझी जांचों से प्रशासनिक दक्षता और न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने कहा कि सभी जांच अधिकारियों को सौंपी गई जांचों को पूरा करने के लिए तीन महीने (90 दिन) की समय सीमा का कड़ाई से पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच में हो रही देरी दोषी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई में बाधा डाल रही है।
झूठे आरोपों में फंसे अधिकारियों के लिए भी इससे अनिश्चितता बढ़ रही है। जांच रिपोर्ट जमा करने में देरी से अनुशासनात्मक प्रक्रिया के दंडात्मक और सुरक्षात्मक, दोनों पहलू प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि विभागीय जांच का उद्देश्य प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखते हुए जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यह खेद का विषय है कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद कई जांचें वर्षों तक अनसुलझी रहती हैं। शिक्षा निदेशक ने कहा कि इन जांचों में तेजी लाने में विफलता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई जांच अधिकारी बिना किसी उचित कारण के कार्यवाही में देरी करता पाया जाता है, तो मामले की सूचना आगे की कार्रवाई के लिए सरकार को दी जाएगी। इसमें स्वयं जांच अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही भी शामिल हो सकती है।
