
हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने विद्युत बोर्ड के अध्यक्ष को कर्मचारी विरोधी और अनियमितताओं बताते हुए उन्हें तुरंत पद से हटाने और महासंघ के पदाधिकारियों की चार्जशीट को निरस्त करने की मुख्यमंत्री से मांग की है। साथ ही मुख्यमंत्री को पूरे मामले में हस्तक्षेप कर बिजली बोर्ड कर्मचारियों के साथ हो रही ज्यादतियों और उनके मुद्दों को हल करने की मांग उठाई है। महासंघ ने दो टूक कहां यदि समय रहते कर्मचारी विरोधी निर्णय वापस नहीं लिए गए तो हिमाचल प्रदेश के कर्मचारी सड़कों पर लाम बंद होंगे जिसकी पूरी जिम्मेवारी प्रदेश सरकार की होगी।
संयुक्त कर्मचारी महासंघ के राज्य अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान,संरक्षक गोविंद चितरांटा, कुलदीप खरवाड़ा ,अरुण गुलरिया, मुख्य आयोजन सचिव कामेश्वर शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनोद कुमार, वनिता सकलानी व सुनील जरयाल, उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र डोगरा ,डॉक्टर बीएस दिलटा, डॉ. नितिन व्यास, मान सिंह ,गीता राम शर्मा, वित्त सचिव खेमेंद्र गुप्ता, डिप्टी जनरल सेक्रेटरी तिलक नायक, मनोज शर्मा, तारा दत शर्मा ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि जिस तरह से विद्युत बोर्ड के अध्यक्ष कार्य कर रहे हैं और संघ के पदाधिकारी के खिलाफ बदले की भावना से काम कर उनके खिलाफ चारशीट और अन्य कार्रवाई कर रहे हैं वह बहुत ही निंदनीय है । सरकार को तुरंत प्रभाव से उन्हें पद से हटा देना चाहिए।
चौहान ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री 7 अगस्त से पहले उनकी यह मांगें पूरी नहीं हुईं तो मजबूरन संयुक्त कर्मचारी महासंघ, विद्युत बोर्ड कर्मचारी महासंघ के साथ इस संघर्ष में खड़ा हो जाएगा। सयुंक्त कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारी ने कहा कि इससे पहले भी महासंघ कई बार मुख्यमंत्री से मिलकर कर्मचारियों की अलग-अलग मांगों को मांगपत्र के माध्यम से रख चुका है जिसका अभी तक कोई हल नहीं हुआ है। महासंघ की मुख्य मांगों में कर्मचारियों का 11 प्रतिशत डीए का बकाया और इसके अतिरिक्त डीए के एरियर की बकाया राशि सहित छठे वेतन आयोग के एरिया की बकाया राशि देने की मांग की गई है।
4-9-14 टाइम स्केल को बहाल करने की मांग ,कॉलेज और यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम यूजीसी की तर्ज पर देने, छूट गए विभागों, बोर्डों, निगमों के कर्मियों को पुरानी पेंशन बहाल करना शामिल है। सभी विभागों, बोर्ड-निगम में खाली पड़े पदों को भरने और पदोन्नति करने तथा पदों को समाप्त करने पर सभी कर्मचारी संगठनों ने आपत्ति व्यक्त की। करुणामूलक आधार पर सभी विभागों में पदों को भरने और इनकम सीलिंग शर्त को 6 लाख तक बढ़ाने की मांग की गई। एचआरटीसी को रोडवेज का दर्जा देने और एचआरटीसी कर्मियों के ओवर टाइम की बकाया राशि तुरंत जारी करने, बिजली बोर्ड में 600 पदों को समाप्त करने के फैसले पर रोक लगाने, विघटन और निजीकरण को ना करने सहित अन्य मांगें शामिल हैं।
