आरट्रैक के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने कहा है कि सेना के पाठ्यक्रम में 34 नई तकनीकें शामिल की जाएंगी। इसके साथ ही सैनिकों को उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा बुधवार को सेना प्रशिक्षण कमान शिमला (आरट्रैक) के 35वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि आरट्रैक की स्थापना 1 अक्तूबर 1991 को महू में की गई थी। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण और आधुनिक युद्ध के सोच-विचार केंद्रित एक केंद्रीय एजेंसी बनाना था। 31 मार्च 1993 को शिमला आने के बाद इसकी भूमिका में वृद्धि हुई है।

अब आरट्रैक देशभर में फैले 34 श्रेणी ए प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों में संस्थागत प्रशिक्षण के उच्चतम मानकों के लिए मार्गदर्शन देता है। आरट्रैक शिमला में आयोजित समारोह में लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कार्यक्रम में 18 विभिन्न रैंक के जवानों को विशिष्ट उपलब्धि के लिए आरट्रैक जीओसी-इन-सी प्रशंसा प्रमाणपत्र, जीओसी-इन-सी स्पोर्ट्स बैनर और तीन प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों को वर्ष के लिए वित्तीय उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किए।

स्थापना दिवस समारोह में समकालीन और भविष्य की युद्ध प्रणाली को समर्पित आरट्रैक की वार्षिक पेशेवर पत्रिका पिनैकल के 24वें संस्करण का विमोचन भी किया गया। लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने कहा कि आरट्रैक की सारी कोशिशें भारतीय सेना के ‘परिवर्तन का दशक और तकनीकी आत्मसात का वर्ष’ पहल के अनुरूप हैं।  शर्मा ने कहा कि आरट्रैक वर्ष 2030 तक अपने पाठ्यक्रम में 34 नई तकनीकों को शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इस साल 18,000 सैनिकों को उन्नत प्रशिक्षण दिया गया है। अगले वर्ष 12,000 और सैनिकों को प्रशिक्षण देने की योजना है। उन्होंने कहा कि सीओएएस प्रशिक्षण निर्देश की समयावधि दो साल से बढ़ाकर चार साल कर दी गई है।

आरट्रैक की ओर से तैयार पहली सीओएएस चौवर्षिक प्रशिक्षण निर्देशिका (2025-29) 1 अप्रैल 2025 को जारी किया गया। उन्होंने बताया कि उच्च तकनीक को शामिल करने के लिए आरट्रैक ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों सहित अग्रणी संस्थानों से कई समझौता व ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे संयुक्त अनुसंधान और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने बताया कि योजनाबद्ध युद्ध प्रक्रिया को सुधारने के लिए, विरोधाभासी सोच का उपकरण रेड टीमिंग संस्थागत स्तर पर लागू किया गया है। इस क्षेत्र में पिछले वर्ष में प्राप्त अनुभव अब अन्य दो सेनाओं के साथ साझा किए जा रहे हैं।