
हिमाचल प्रदेश में स्पीति घाटी में काजा से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर एक ऊंचे पहाड़ी टीले पर स्थित काकती देश के सबसे अनोखे गांवों में शुमार है। यहां पूरे गांव की आबादी केवल एक ही घर में रहती है। सरकारी रिकॉर्ड में जहां काकती गांव की कुल भूमि मात्र 15 बीघा दर्ज है, वहीं वास्तविकता में पूरा गांव 300 साल पुराने मिट्टी और पत्थरों से बने एक मड हाउस में सिमटा हुआ है। यही घर इस गांव की पहचान भी है और इसकी पूरी आबादी भी।
इसी घर में रहते हैं छेरिंग नामग्याल, उनकी पत्नी और उनके दो बच्चे। यह परिवार अपने वंश की पांचवीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। काकती गांव राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज गांव है। एडीसी काजा शिखा सिमटिया ने बताया कि काकती राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज गांव है। दावा किया जा रहा है कि यह देश का पहला ऐसा गांव है, जहां केवल एक ही घर में पूरी आबादी निवास करती है।
मिट्टी और पत्थरों से बना यह पारंपरिक मड हाउस हिमालयी वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। गर्मियों में यह घर प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है, जबकि सर्दियों में भीतर की गर्मी को संजोए रखता है। जब बाहर का तापमान शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है, तब भी यह घर परिवार को सुरक्षित और अपेक्षाकृत गर्म आश्रय प्रदान करता है।
दिलचस्प बात यह है कि यह एक घर वाला गांव अब डिजिटल इंडिया से भी जुड़ चुका है। बीएसएनएल ने यहां 4जी टावर स्थापित किया है। छेरिंग बताते हैं कि पहले खबरें हफ्तों बाद मिलती थीं लेकिन अब मोबाइल के जरिए वे पूरी दुनिया से जुड़े हुए हैं।
