
अब डेडिकेटेड स्टाफ मिलेगा, नॉन ट्रांसफरेबल होगी नौकरी
आईजीएमसी में 40 फीसदी, तो चंबा कॉलेज में 30 फीसदी स्टाफएमर्जें
सी मेडिसन डिपार्टमेंट में भी तैनात होंगे सुपर स्पेशलिस्ट
हिमाचल के हेल्थ सेक्टर में हुए सुधारों में एक बड़ा सुधार स्टाफ के कैडर सेपरेशन का है। हिमाचल में वर्ष 1996 से डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन विभाग अलग से तो बना, लेकिन मेडिकल कॉलेज के लिए स्टाफ पैटर्न अलग से नहीं था। इस कारण निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं कैडर के अस्पतालों से ही मेडिकल कॉलेज में एंट्री और एग्जिट हो जाता था। टीचिंग फैकल्टी के अलावा बाकी पद इसी कारण मेडिकल कॉलेज में भरे नहीं जा सके। अब हिमाचल सरकार ने मेडिकल कॉलेज और डायरेक्टर हैल्थ सर्विसेज का कैडर अलग-अलग कर दिया है। कैडर सेपरेशन के बाद पता चला है कि मेडिकल एजुकेशन निदेशालय में कुल स्वीकृत पद 8981 हैं। इनमें से 4687 पद ही भरे गए हैं, जबकि 4294 अभी खाली चल रहे हैं।
ये रिक्तियां करीब 50 फ़ीसदी के आसपास हैं। हालत यह है कि आईजीएमसी 40 फ़ीसदी पदों के साथ, जबकि चंबा मेडिकल कॉलेज महज 30 फ़ीसदी पदों के साथ चल रहा था। इन्हीं दिक्कतों को दूर करने के लिए लगभग तीन दशक बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मेडिकल कॉलेज में रिसर्च को मजबूत करने के लिए कैडर अलग कर दिया।
अब फील्ड के अस्पतालों को डायरेक्टर हैल्थ सर्विसेज का कैडर देखेगा, जबकि राज्य के छह सरकारी मेडिकल कॉलेज डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन कैडर से मैनेज किए जाएंगे। आज आईजीएमसी के अलावा कांगड़ा के टांडा, हमीरपुर, मंडी के नेरचौक, सिरमौर के नाहन
