
पूरी खबर:
हिमाचल प्रदेश के सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के लिए नया ड्रेस कोड 1 अक्तूबर से लागू हो गया है। इसके साथ ही ड्यूटी के दौरान शिक्षकों के लिए पहचान पत्र पहनना भी अनिवार्य किया गया है। शिक्षा विभाग के अनुसार नई व्यवस्था का उद्देश्य स्कूलों में अनुशासन, एकरूपता और पेशेवर कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देना है।
नई व्यवस्था के तहत महिला शिक्षकों के लिए हल्के लाइलैक यानी बैंगनी रंग की पोशाक निर्धारित की गई है। उन्हें दो विकल्प दिए गए हैं। पहला विकल्प लाइट लाइलैक साड़ी के साथ डार्क लाइलैक या पर्पल ब्लेजर है। दूसरा विकल्प लाइट लाइलैक कुर्ता या कमीज के साथ पैंट, पलाजो या सलवार और दुपट्टा है। इसके साथ डार्क लाइलैक या पर्पल ब्लेजर रखना होगा।
सर्दियों के मौसम में फुल या हाफ स्लीव स्वेटर पहनने की अनुमति होगी। कैप और ग्लव्स के लिए नेवी ब्लू रंग तथा मोजों के लिए ग्रे या नेवी ब्लू रंग निर्धारित किया गया है। फुटवियर काले रंग का रखना होगा।
पुरुष शिक्षकों के लिए हल्के नीले रंग की शर्ट और निर्धारित रंग की पैंट के साथ नेवी ब्लू ब्लेजर रखा गया है। इसके अलावा काली बेल्ट, ग्रे या नेवी ब्लू मोजे और काले जूते पहनना अनिवार्य होगा। ठंड के मौसम में नेवी ब्लू स्वेटर की अनुमति रहेगी। पगड़ी, कैप और ग्लव्स के लिए भी नेवी ब्लू रंग निर्धारित किया गया है।
शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को ड्यूटी के दौरान अपना पहचान पत्र स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अत्यधिक आभूषण और अनावश्यक सहायक वस्तुओं के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई है।
इससे पहले सरकार ने प्रदेश के सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों के ड्रेस कोड को 1 अक्तूबर से लागू करने का निर्णय लिया था। विभाग की अधिसूचनाओं में यह व्यवस्था सरकारी सीबीएसई स्कूलों से संबंधित बताई गई है।
हालांकि, निर्धारित ड्रेस को लेकर कुछ शिक्षकों की ओर से आपत्तियां भी सामने आई हैं। जिला स्कूल प्रवक्ता संघ ने कहा है कि तय रंग का कपड़ा बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं होने के कारण शिक्षकों को परेशानी हो रही है और नई व्यवस्था को अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने की मांग की गई है।
