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शिमला। हिमाचल प्रदेश की ग्राम पंचायतों और नगर निकायों में विकास कार्यों और सामग्री खरीद के भुगतान के दौरान जीएसटी समेत अन्य वैधानिक मदों की कटौती को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। कई मामलों में ठेकेदारों के बिलों से राशि काटी गई, लेकिन संबंधित सरकारी विभागों में जमा नहीं करवाई गई। वहीं, कुछ मामलों में निर्धारित जीएसटी-टीडीएस की कटौती किए बिना ही ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को पूरा भुगतान कर दिया गया।
निरमंड में 7.56 लाख रुपये की कटौती, जमा नहीं हुई
नगर पंचायत निरमंड के वर्ष 2023-24 से 2024-25 के लेखों की जांच में ठेकेदारों के बिलों से कुल 7,55,909 रुपये की कटौती सामने आई।
इसमें 2,97,215 रुपये जीएसटी, 1,16,095 रुपये आयकर, 1,48,608 रुपये श्रम प्रभार और 1,93,991 रुपये रॉयल्टी शामिल थी।
ऑडिट के अनुसार इतनी बड़ी राशि काटे जाने के बावजूद इसे संबंधित विभागों में जमा नहीं करवाया गया। राज्य लेखा परीक्षा विभाग ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता और सरकारी आदेशों की अवहेलना माना।
गोपालपुर में बिना कटौती के हुआ 10.58 लाख का भुगतान
ग्राम पंचायत गोपालपुर में अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक के लेखों की जांच में दूसरी तरह की अनियमितता सामने आई।
पंचायत की ओर से रेत, क्रशर, ब्लॉकर, ईंट, सीमेंट और ढुलाई आदि के लिए 10,58,375 रुपये का भुगतान किया गया। इस भुगतान पर नियमानुसार 21,167.50 रुपये जीएसटी-टीडीएस काटा जाना था, लेकिन यह राशि काटे बिना ही पूरा भुगतान कर दिया गया।
ऑडिट में इसे अनुचित प्रक्रिया माना गया और कटौती योग्य राशि वसूलकर संबंधित विभाग में जमा कराने के निर्देश दिए गए।
सरकार ने क्या कहा?
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह के अनुसार जीएसटी की वसूली को अनिवार्य किया गया है और वेंडर्स को जीएसटी नंबर देने के लिए कहा गया है। जहां जीएसटी की वसूली नहीं हो रही है, वहां मामले को देखा जाएगा।
वहीं, नगर नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि जीएसटी को काटना और जमा करना अनिवार्य वैधानिक प्रक्रिया है। इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा और मामले की जांच की जाएगी।
